देश की आजादी के लिए लड़ने वाले टीहरा पंचायत के ढुली गांव के स्वतंत्रता सेनानी हरि सिंह का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सोमवार को उनके पैतृक गांव ढुली में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी हरि सिंह 2 अगस्त, 1940 को पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। उन्होंने मेरठ में एक वर्ष का प्रशिक्षण लिया और नंवबर 1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय सिंगापुर में जापानी सेना के खिलाफ जंग लड़ने भेजे गए। 1942 को जापानी सेना ने इनकी टुकड़ी को बंदी बना लिया।
इसके बाद इन्हें मलयेशिया और कोलालांपुर जेल में रखा गया। बाद में सुभाष चंद्र बोस के साथ जापानी सेना का समझौता होने पर इन्हें वहां से मुक्त करवाया गया। इसके बाद वे आजाद हिंद की सेना में शामिल हो गए। उन्होंने 1942 से 1945 तक अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं।
वे एक बार फिर इंफाल, रंगून आदि जेलों में रहे। आईपीएच मंत्री महेंद्र ठाकुर, भाजपा मीडिया प्रभारी नरेंद्र अत्री समेत विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि उनके अंतिम संस्कार में पहुंचे। टिहरा पंचायत प्रधान सुरेंद्र पठानिया ने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तरफ से अंतिम सलामी दी गई।
इस दौरान बीडीसी चेयरमैन विनोद कुमार, टिहरा पंचायत प्रधान सुरेंद्र पठानिया, उपप्रधान बृज लाल, कोट पंचायत प्रधान यश पठानिया, मशहूर लोक गायक जगदीश सनवाल, सुखराम, ओम चंद, कैप्टन शेर सिंह अत्री, गोविंद चंद, प्रेम सिंह, डॉ प्रदीप आदि मौजूद रहे।