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Shimla News: फोरलेन से घर दरका, फर्श पर सोने को मजबूर प्रभावित

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चलौंठी में भवनों में दरारें आने के बाद शिफ्ट किए परिवार झेल रहे परेशानी
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जगह की कमी के कारण बाहर ही पड़ा है सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के चलौंठी क्षेत्र में नौ जनवरी को मकान में दरारें आने के बाद बेघर हुए परिवार कड़ाके की ठंड में अब फर्श पर सोने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को चलौंठी के जिला परिषद भवन में ठहराया है लेकिन यहां इन्हें खाने के लिए भी भटकना पड़ रहा है।

प्रभावित परिवारों ने बताया कि घटना के एक दिन बाद ही प्रशासन ने रहने और खाने के लिए व्यवस्था कर दी थी लेकिन यहां पर रहने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने दो कमरों की व्यवस्था की है जो परिवार के अनुसार कम है, परिवार में सात लोग हैं। कई सदस्यों को कड़ाके की ठंड में जमीन पर सोना पड़ रहा है। घर का आधा सामान बाहर पड़ा है। इन कमरों में रसोई तक की सुविधा नहीं हैं, यहां गैस का उपयोग नहीं कर सकते हैं। प्रभावित लोगों ने बताया कि प्रशासन ने खाने की व्यवस्था पंचायत भवन की कैंटीन में कर रखी है। लेकिन कई बार यहां पर प्रशासन की बैठकें होती हैं तो उस दौरान खाना नहीं मिलता है। इसके कारण पूरे परिवार को खाने के लिए भटकना पड़ता है। बाहर जाकर खाने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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प्रभावितों ने बताया कि घटना के समय एनएचआई ने मकान को अधिग्रहण करने की बात कही थी। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावितों का कहना है कि इस तरह यहां कब तक रहेंगे। ऐसे हालात में जीवन यापन करना मुश्किल है। लोगों ने बताया कि यहां पर छह परिवारों को रखा गया था। दो परिवार सुविधाओं के अभाव के कारण चले गए हैं। अभी चार परिवार यहां रह रहे हैं। यह भी रहने के लिए किराये पर मकान ढूंढ रहे हैं।
गौरतलब है कि बीते नो जनवरी को चलौंठी में फोरलेन की निर्माणाधीन टनल के उपर बने एक मकान में दरारें आने के बाद प्रशासन ने एक होटल समेत दो मकानों को आधी रात को खाली करवा दिया था। इस घटना के कारण 17 परिवार बेघर हो गए थे।



किराये के लिए ढूंढ रहे मकान : पूजा
मकान मालिक पूजा शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने रहने और खाने ही व्यवस्था की है लेकिन यहां पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कमरों में रसोई की सुविधा नहीं है, यहां गैस का उपयोग नहीं कर सकते हैं। यहां पर जिला प्रशासन की कोई बैठक होती है तो उस दौरान कैंटीन में खाना नहीं मिलता। यहां पर जगह कम है, सामान आधा बाहर ही पड़ा है। ठंड के समय में जमीन पर सोना पड़ रहा है। अब किराये पर मकान ढूंढ रहे हैं।
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खाने के लिए भटकना पड़ रहा है : परीक्षित
किराएदार परीक्षित ने बताया कि ठंड का समय है। इस घटना से पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। यहां पर सुविधाओं का अभाव है, रसोई भी नहीं है। इस भवन में जब प्रशासन की कोई बैठक होती है तो खाना नहीं मिलता। ऐसे में खाने के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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