केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी रेणुका बांध प्रोजेक्ट के लिए धनराशि जारी करने के आदेश के बाद इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। प्रोजेक्ट बनने से विकास की बयार आएगी। इससे राजधानी दिल्ली में पेयजल संकट से निजात मिलेगी, लेकिन सिरमौर की 20 पंचायतें उजड़ जाएंगी।
जिले की 20 पंचायतों को विस्थापन का दंश झेलना होगा। प्रोजेक्ट निर्माण में हुई देरी से इसकी लागत अब दोगुना से अधिक बढ़ गई है। शुरुआती दौर में प्रोजेक्ट की लागत 1300 करोड़ थी। यह बढ़कर पांच हजार करोड़ से ऊपर चढ़ गई है। वर्ष 1982 से अब तक 35 वर्षों के सफर में रेणुका बांध ने कई करवटें ली हैं।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के बाद अब सुप्रीमकोर्ट ने भी बांध निर्माण को हरी झंडी दे दी है। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1982 में गिरि नदी पर बांध बनाने का सपना देखा था। उस वक्त इसकी अनुमानित लागत 1300 करोड़ थी। यह बढ़कर 5300 करोड़ पहुंच चुकी है। परियोजना के कार्यकारी महाप्रबंधक बीबी खुल्लर ने बताया कि परियोजना की लागत पांच हजार करोड़ से अधिक हो गई है।
यह होंगे बांध निर्माण के फायदे
रेणुका बांध 49 हजार 800 हेक्टेयर मीटर क्षमता का होगा। इसकी ऊंचाई 148 मीटर होगी। बांध बनने से 60 मेगावाट के गिरि पावर प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। सर्दियों में गिरि प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन घट जाता है। बांध बनने के बाद उत्पादन नहीं घटेगा। प्रोजेक्ट बनने के बाद गिरि पावर प्रोजेक्ट की उत्पादन क्षमता करीब 93.83 मिलियन यूनिट होगी। पर्यटन की अपार संभावनाएं बढ़ेगी। बिलासपुर के कोलबांध की तर्ज पर मत्स्य उत्पादन में भी इजाफा किया जा सकेगा।
दिल्ली में नहीं रहेगी पानी की किल्लत
राजधानी दिल्ली में अक्सर पानी की किल्लत रहती है। यह प्रोजेक्ट बनने के बाद दिल्ली के लिए 23 क्यूमेक्स प्रति सेकेंड पानी छोड़ा जाएगा। पानी स्टोर होने से गर्मियों में भी दिल्ली को पानी मिलेगा। खास यह है कि 23 क्यूमेक्स पानी छोड़ने से दिल्ली में पूरे साल एक समान पानी मिलेगा।
बांध के लिए उजड़ेंगे ग्रामीण, कटेंगे पेड़
रेणुका बांध परियोजना के निर्माण के लिए सिरमौर की 20 पंचायतें विस्थापित होंगी। सवा लाख से अधिक छोटे-बड़े पेड़ कटेंगे। हालांकि, विस्थापितों को सिरमौर में ही बसाने की योजना है, लेकिन पुरखों के जमाने में बने मकानों के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं। इन्हें छोड़कर दूसरी जगह बसना पीड़ादायक रहता है। कुल 1142 परिवार परियोजना के लिए विस्थापन का दंश झेलेंगे।