प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में एमसीआई की टीम ने बड़ी लापरवाही पकड़ी है। श्वास रोग विभाग में तैनात कर्मचारी ड्यूटी में कोताही बरत रहे हैं। इसका खुलासा अस्पताल में एमसीआई की टीम के निरीक्षण के दौरान हुआ। श्वास रोग विभाग के कर्मचारी कुर्सियों पर बैठकर मरीजों को टीबी के इलाज की जानकारी दे रहे थे।
एमसीआई की टीम ने कोताही बरतने को लेकर विभाग के स्टाफ के लोगों को फील्ड में अर्थात पूरे अस्पताल में जाकर बीमारी से संबंधित जानकारी देने को कहा। अस्पताल में पल्मोनरी विभाग में बड़ोदा से एमसीआई की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची थी। विभाग में दो एमडी सीटों की परीक्षा चल रही थी।
टीम ने छात्रों की परीक्षा का पूरा ब्यौरा जांचा और प्रत्येक डॉक्टरों के ब्यौरों की विस्तृत जांच की। दोपहर करीब सवा बारह बजे अचानक टीम ने ओपीडी का निरीक्षण किया और यहां पर रजिस्ट्रर को चेक किया। इसके बाद टीम वार्डों में चल रही परीक्षा दे रहे छात्रों के पास पहुंची।
लखनऊ की टीम ने ईएनटी के अलावा मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ईएनटी विभाग में लखनऊ से पहुंची एमसीआई की टीम ने ओपीडी, ओटी का निरीक्षण किया। इधर विभाग को निरीक्षण की सूचना थी तो तैयारियां भी जोरों पर थी। टीम ने आते ही विभागाध्यक्ष से मुलाकात कर डॉक्टरों का ब्यौरा लिया।
इसके बाद टीम दो जूनियर डॉक्टरों को साथ लेकर इमरजेंसी मेडिसन वार्ड पहुंची। टीम ने स्टाफ नर्स सहित वार्ड में बिस्तरों व मरीजों का ब्यौरा हासिल किया। यहां पर जब टीम ने कितनी नर्सें कार्य कर रही है तो टीम ने कहा कि यहां पर तो बारह नर्सें कार्य कर रही है लेकिन वार्ड सिस्टर ने कहा कि मौजूदा समय में सात ही काम कर रही हैं।
एमसीआई की टीम ने दौरा किया है। ईएनटी में इक्यूपमेंट के बारे में उन्होंने कहा कि अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले सभी इक्यूपमेंट पूरे हैं। विभाग में चार एमएस की सीटों पर परीक्षा चल रही थी। - डॉ. मोहिंद्रु, ईएनटी विभागाध्यक्ष, आईजीएमसी
यहां भी पहुंची टीम
बोयोकेमेस्ट्री, पैथोलोजी और ब्लड बैंक।
टीम ने आना था तो पहले दिखी मुस्तैदी
एमसीआई की टीम के आने की खबर पहले ही थी। इस पर दोनों विभागों ने मौके का चौका भी जड़ा। टीम के आने पर सभी जूनियर डॉक्टर भी बारी बारी से मरीजों का खास ख्याल रखने लगे तो दवाइयों आदि का इंतजाम भी खुद ही किया। इधर देखा गया है कि ओपीडी में आए डॉक्टर मरीजों के साथ बुरा बर्ताव भी करते है।
जिसके कारण मरीजों व तीमारदारों को कई मर्तबा घरों को निराश होकर लौटना पड़ता है। लेकिन शनिवार का दिन मरीजों के लिए अच्छा रहा। सभी डॉक्टर पूरी तरह मुस्तैद दिखे। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन होेने के कारण अस्पतालों में भीड़ कम रहती है और टीम के होने के कारण गलत बर्ताव करने से मान्यता मिलने वाली सीटों से भी हाथ धोना पड़ सकता था। इधर वार्ड में साफ सफाई का भी विशेष ध्यान रखा गया था।