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शिमला: अब भाजपा विधायक धवाला के समर्थन में उतरे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शास्त्री

Mon, 17 Jan 2022 10:51 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

पूर्व विस अध्यक्ष राधारमण शास्त्री ने कहा कि वह खुद मार्च के बाद चौपाल क्षेत्र का दौरा करेंगे। यह जानेंगे कि जनता अगले प्रतिनिधि के बारे में क्या विचार रखती है। जहां तक चुनाव लड़ने का प्रश्न है तो अगर जनता चाहेगी तो जरूर लड़ेंगे।
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राधारमण शास्त्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा के टिकटों पर जल्दी फैसला लेने के ज्वालामुखी के भाजपा विधायक रमेश धवाला के बयान के समर्थन में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राधारमण शास्त्री भी उतर गए हैं। शास्त्री ने कहा है कि भाजपा विधायकों के जहां भी दुविधा की स्थिति बनी हुई है, वहां प्रत्याशियों को अभी से तय कर देना चाहिए। यह मालूम रहे कि धवाला और शास्त्री दोनों पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार गुट के नेता हैं। शास्त्री शांता सरकार में शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। इन दोनों नेताओं के बयान से भाजपा में नई बहस छिड़ गई है। 

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हाल ही में रमेश धवाला का बयान आया है कि  भाजपा के टिकटों का फैसला अभी से कर देना चाहिए। इससे भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में लाभ होगा। इस पर रविवार को राधारमण शास्त्री ने कहा कि उनका यह वक्तव्य कि टिकटों का फैसला भाजपा को पहले कर देना चाहिए, जिससे कई क्षेत्रों में पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति न रहे। उनका यह मत है कि धवाला अपनी जगह पर ठीक बात कर रहे हैं। धवाला एक ईमानदार नेता हैं।

वह फील्ड में रहकर काम कर रहे हैं। उनकी चिंता है कि वे दुविधा में न रहें। जहां पर भी संदिग्ध वाली स्थिति हो वहां प्रत्याशी स्पष्ट हों तो आने वाले दिनों में चुनाव के समय में लाभ होगा। जहां तक पार्टी के टिकटों का प्रश्न है, वर्तमान में जो विधायक होते हैं, उनका प्रदर्शन अच्छा रहे तो उनमें जिताऊ लोगों को भी देखा जाता है। बाकी टिकटों के बारे में तो हाईकमान को ही निर्णय लेना होता है। 
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मार्च से चौपाल की जनता के बीच जाकर पूछूंगा कि चुनाव लडूं कि नहीं: शास्त्री
पूर्व विस अध्यक्ष राधारमण शास्त्री ने कहा कि जहां तक उनकी अपनी बात है तो उनका यह कहना है कि वह खुद मार्च के बाद चौपाल क्षेत्र का दौरा करेंगे। यह जानेंगे कि जनता अगले प्रतिनिधि के बारे में क्या विचार रखती है। जहां तक चुनाव लड़ने का प्रश्न है तो अगर जनता चाहेगी तो जरूर लड़ेंगे। अगर जनता मना करेगी तो वह दुराग्रह के साथ नहीं चलेंगे और न ही चुनाव लड़ेंगे।

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