कार्यकर्ताओं की मंशा भांपते हुए उन्होंने कहा - अरे, मित्रों कोई बात नहीं। फिल्म के बीच इस तरह का बैकग्राउंड म्यूजिक भी जरूरी है..., तभी तो मजा आएगा। इतना सुनते ही पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
ठहाकों की आवाज इतनी जोरदार थी कि नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ता भी शांत हो गए। नाहन कॉलेज में उस दौरान शिक्षा ग्रहण कर रहे सुरेश कुमार, जीएस नेगी, अरुण जोशी और मामराज शर्मा ने कहा कि अटल को सुनने के लिए वे उत्सुक थे।
उन्होंने ऐसे बोल बोले कि जनसभा का माहौल ही अचानक बदल गया। ऐसे हाजिर जवाब नेता थे अटलजी। इसके बाद अटल करीब 45 मिनट तक बोले, एक भी बार विरोधी पार्टी पर अमर्यादित किसी भाषा का प्रयोग नहीं किया।
वर्ष 1980 में अटल जब पार्टी अध्यक्ष थे तो उन्होंने नाहन के एक पत्रकार से अलग से मुलाकात कर जिताऊ उम्मीदवार का नाम देने की बात कही थी। इसके बाद हालांकि कभी पत्रकार ने न उनसे बात की और न उनका फोन आया। एक बार एक नेता के आग्रह पर पत्रकार एसपी जैरथ ने उन्हें फोन किया।
उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे बैक कॉल आई। उनसे काफी देर बात हुई। उन्होंने नेता का नाम सुझाया और उन्हें टिकट भी दिया गया। यह बात अलग है कि उनके सुझाए नेता चुनाव में विजयी नहीं हो पाए।