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Shimla News: लाल रसीले अनार के पौधों के साथ वन विभाग निकालेगा झांकी

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वन संवर्द्धन योजना के लाभों की जाएगी जानकारी, फलदार पौधों के जंगलों के बीच आईबैक्स और हिम तेंदुआ भी आएगा नजर
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60 फीसदी फलदार पौधे जंगलों में लगाना किए गए हैं जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान पर गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में इस बार हिमाचल प्रदेश वन विभाग की झांकी नजर आएगी। झांकी में राज्य के जंगलों में लगाए जा रहे जामुन, आंवला, दाड़ू और अनार जैसे फलदार पौधों को दिखाया जाएगा। वन विभाग की योजना के अनुसार पौधरोपण अभियानों में लगाए जाने वाले 60 प्रतिशत पौधे फलदार होने अनिवार्य हैं।

इन पौधों से वन्य जीवों को भोजन मिलेगा और जंगलों में उनकी जरूरतें पूरी होंगी। इससे बंदरों और अन्य जानवरों का भोजन की तलाश में शहरों की ओर आना कम होगा। झांकी में महिला और युवक मंडल वन संवर्द्धन योजना
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को भी शामिल किया है। इस योजना का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को जंगलों के संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत जंगलों को बचाने और उनके संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला और युवक मंडलों को वन महोत्सव के दौरान सम्मानित किया जाएगा। यह योजना वनों की सुरक्षा और संरक्षण में जनसहभागिता को बढ़ावा देने के लिए बनाई है। इसके अतिरिक्त झांकी में हिमाचल की जैव विविधता की झलक भी दिखाई जाएगी। इसमें हिमालयी क्षेत्र के विशिष्ट और दुर्लभ वन्य जीव जैसे आईबैक्स, हिम तेंदुआ, जाजूरना और मोनाल को दिखाया जाएगा। यह हिस्सा जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर देगा और जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करेगा।
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कोट
झांकी का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के महत्व को उजागर करना और वनों के विस्तार की दिशा में राज्य के प्रयासों को दिखाना है। फलदार पौधों की पहल न केवल वन क्षेत्र को बढ़ाने में सहायक होगी बल्कि वन्य जीवों और मानव के बीच संतुलन बनाने में भी योगदान देगी। वन विभाग की यह झांकी पर्यावरण संरक्षण में राज्य की प्रतिबद्धता और समुदाय की भागीदारी को प्रदर्शित करते हुए सतत विकास का संदेश देगी।
-सरोज वर्मा, डीएफओ प्रचार एवं पर्यावरण पर्यटन विभाग
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