कनलोग में रह रहे मजदूरों ने बताया कि पिछले हफ्ते भी तेंदुआ यहां रात के समय दिखाई दिया था। एक मजदूर ने इसे देखा था। मजदूर को देखकर यह साथ लगते जंगल में भाग गया था। साथ लगते ढारे में रह रहे मजदूरों ने एक कुत्ता पाल रखा था। अंदेशा है कि तेंदुआ इसके शिकार के लिए लगातार यहां आ रहा था।
एक बार तेंदुआ दिखने के बाद मजदूर डर तो गए थे लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा कि यह फिर आएगा। चार मंजिला निर्माणाधीन मकान जिसके ग्राउंड फ्लोर में मजदूरों के ढारे बने हैं, वह चारों ओर से घने जंगल से घिरा है। ढारों के अंदर लाइट को थी लेकिन बाहर लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। शुक्रवार को वन विभाग ने ठेकेदार से यहां लाइट के प्रबंध करने को कहा।
शहर के इन इलाकों में तेंदुए की दहशत
शहर के कनलोग, खलीनी, कृष्णानगर, विकासनगर, कसुम्पटी, रामनगर, छोटा शिमला, नवबहार, सांगटी, मल्याणा, समिट्री एरिया में कई बार तेंदुआ रिहायशी इलाके में घूमता देखा जा चुका है। वन विभाग के अनुसार जंगल से घिरे रिहायशी इलाके में तेंदुए की दस्तक ज्यादा रहती है। लावारिस कुत्तों की तलाश में तेंदुआ इन इलाकों में आता जाता रहता है।
पिंजरे से एक भी तेंदुआ नहीं पकड़ा
शहर में पहले भी वन विभाग पिंजरे लगा चुका है। लेकिन आज तक एक भी तेंदुआ इससे पकड़ में नहीं आया। कई बार खाली पिंजरे भी लगाए जा चुके हैं।