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शिमला: विभाग ने तेंदुआ को पकड़ने के लिए लगाए सिर्फ दो पिंजरे

Sat, 07 Aug 2021 11:49 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

अब पांच साल की बच्ची की मौत से शहरवासी दहशत में आ गए हैं। वन्यजीव विभाग का कहना है कि अभी इस तेंदुए को आदमखोर घोषित नहीं किया जा सकता। विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए सिर्फ दो पिंजरे लगाए हैं। 
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तेंदुआ को पकड़ने के लिए लगाए दो पिंजरे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तेंदुए के किसी इंसान को शिकार बनाने का यह पहला मामला है। इससे पहले 20 जून को कृष्णानगर में पालतू कुत्ते के शिकार के लिए आए तेंदुए ने यहां रहने वाले युवक पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया था। अब पांच साल की बच्ची की मौत से शहरवासी दहशत में आ गए हैं। वन्यजीव विभाग का कहना है कि अभी इस तेंदुए को आदमखोर घोषित नहीं किया जा सकता। विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए सिर्फ दो पिंजरे लगाए हैं। यह पिंजरे उसी निर्माणाधीन भवन के आसपास लगाए गए हैं जहां से गुरुवार रात साढ़े आठ बजे तेंदुए ने बच्ची को उठाया था।

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इसके अलावा तीन ट्रैप कैमरे और लगाए जाएंगे। यह कैमरे रात के समय इलाके में तेंदुए की गतिविधि पर नजर रखेंगे। दो और कैमरे शनिवार को यहां लगा दिए जाएंगे।  विभाग का कहना है कि एक शिकार के बाद तेंदुआ अपनी लोकेशन बदल देता है। वन्यजीव विभाग की पीसीसीएफ अर्चना शर्मा ने भी शुक्रवार दोपहर घटनास्थल का दौरा किया। अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिंजरे यहां लगाए जाएं। इनके कहने के बाद विभाग ने शाम तक दो पिंजरे यहां लगा दिए। पीसीसीएफ का कहना है कि एक घटना से यह तय नहीं किया जा सकता कि यह तेंदुआ आदमखोर बन गया है। अंदेशा है कि यह कुत्ते के लिए यहां आया था। अचानक बच्ची को देखकर उस पर झपट पड़ा। इसकी गतिविधि देखने के बाद इसे आदमखोर घोषित करने पर फैसला लेंगे।

चार लाख मुआवजा, फौरी राहत देने तक के पैसे नहीं
 जंगली जानवर के हमले में मौत होने पर चार लाख रुपये तक के मुआवजे का प्रावधान है। वन्यजीव विभाग ने इस बारे में डीएफओ शिमला शहरी से रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में मृतक के परिजनों का ब्योरा दिया जाएगा कि किसे यह मुआवजा दिया जाना है। नियमानुसार इस मुआवजे की 25 फीसदी राशि फौरी राहत के तौर पर दी जाती है। बच्ची के परिजनों को भी करीब एक लाख रुपये की फौरी राहत दी जानी थी, लेकिन विभाग के पास इसके लिए पैसा नहीं था। सिर्फ राजस्व विभाग ने पांच हजार रुपये दिए। वन विभाग के अनुसार पहले किसी भी फंड से फौरी राहत दी जा सकती थी। अब ट्रेजरी से यह राशि दी जाती है। अभी ट्रेजरी में महज 25 हजार बचे हैं। ऐसे में मुआवजा देने के लिए जल्द उच्चाधिकारियों को लिखा जा रहा है।
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स्ट्रीट लाइटें खराब, पैदल चलने से डर रहे लोग
शहर के कनलोग इलाके में कई जगह स्ट्रीट लाइटें भी खराब पड़ी हैं। अब तेंदुए की दस्तक के बाद लोग दहशत में है। अंधेरे में ही पैदल चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी सुभाष वर्मा का कहना है कि बीते साल कई बार तेंदुआ यहां रिहायशी इलाके में घूमता रहा, लेकिन वन विभाग ने इसे पकड़ने के लिए पिंजरे तक नहीं लगाए। कहा कि नगर निगम कम से कम स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था तो करे।

यहां समझें पूरा घटनाक्रम 

- फोटो : अमर उजाला
8.30 बजे वीरवार रात ढारे के बाहर से बच्ची को तेंदुआ उठा ले गया 
8:40 बजे पड़ोसी अजय और दादी टॉर्च से बच्ची को तलाशते रहे
8.55 बजे अजय ने बाकी मजदूरों और पुलिस को घटना की सूचना
9.20 नौ बजे वीरवार रात पुलिस मौके पर पहुंची। साढ़े नौ बजे वन विभाग की टीम पहुंची, सर्च ऑपरेशन शुरू
10 बजे ढारे के पीछे करीब 30 मीटर दूर नाले में बच्ची की एक चप्पल मिली 
11 बजे रात को जंगल में अलग-अलग टीमें बनाकर सर्च ऑपरेशन चलाया, कुछ जगह खून के धब्बे मिले
12 बजे रात को बच्ची के फटे हुए कपड़े मिले, रात डेढ़ बजे तक चली तलाश
6 बजे शुक्रवार सुबह फिर शुरू हुई तलाश
6.45 बजे शुक्रवार को ढारे से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर जंगल में बच्ची का क्षत विक्षत सिर और दो हड्डियां मिलीं

 
 
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एक हफ्ते पहले भी ढारे तक पहुंच गया था तेंदुआ

PIC - फोटो : अमर उजाला
 कनलोग में रह रहे मजदूरों ने बताया कि पिछले हफ्ते भी तेंदुआ यहां रात के समय दिखाई दिया था। एक मजदूर ने इसे देखा था। मजदूर को देखकर यह साथ लगते जंगल में भाग गया था। साथ लगते ढारे में रह रहे मजदूरों ने एक कुत्ता पाल रखा था। अंदेशा है कि तेंदुआ इसके शिकार के लिए लगातार यहां आ रहा था।

एक बार तेंदुआ दिखने के बाद मजदूर डर तो गए थे लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा कि यह फिर आएगा। चार मंजिला निर्माणाधीन मकान जिसके ग्राउंड फ्लोर में मजदूरों के ढारे बने हैं, वह चारों ओर से घने जंगल से घिरा है। ढारों के अंदर लाइट को थी लेकिन बाहर लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। शुक्रवार को वन विभाग ने ठेकेदार से यहां लाइट के प्रबंध करने को कहा।

शहर के इन इलाकों में तेंदुए की दहशत
शहर के कनलोग, खलीनी, कृष्णानगर, विकासनगर, कसुम्पटी, रामनगर, छोटा शिमला, नवबहार, सांगटी, मल्याणा, समिट्री एरिया में कई बार तेंदुआ रिहायशी इलाके में घूमता देखा जा चुका है। वन विभाग के अनुसार जंगल से घिरे रिहायशी इलाके में तेंदुए की दस्तक ज्यादा रहती है। लावारिस कुत्तों की तलाश में तेंदुआ इन इलाकों में आता जाता रहता है।

पिंजरे से एक भी तेंदुआ नहीं पकड़ा
शहर में पहले भी वन विभाग पिंजरे लगा चुका है। लेकिन आज तक एक भी तेंदुआ इससे पकड़ में नहीं आया। कई बार खाली पिंजरे भी लगाए जा चुके हैं।
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