फोरेंसिक लैब धर्मशाला के ऊना, कांगड़ा और चंबा में पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज 181 मामलों में खुलासा हुआ है कि इनमें सात मामलों में पिता ने अपनी बेटियों को हवस का शिकार बनाया। दो मामलों में पीड़ित के दादा और तीन मामलों में चाचा ने रिश्तों को कलंकित किया है।
पीड़ित-आरोपी का घर सबसे सुरक्षित- अध्ययन में खुलासा हुआ है कि दुष्कर्म के मामलों को अंजाम देने में पीड़ित और आरोपी का घर सबसे सुरक्षित स्थान होता है। ये मामले तब हुए जब या आरोपी घर पर अकेला था या फिर पीड़ित के घर पर अकेला होने का फायदा उठाया गया।
पीड़ित के घर पर 17.12 प्रतिशत मामलों को अंजाम दिया गया, जबकि पीड़ित ने अपने घर पर 38.67 प्रतिशत मामलों में दुष्कर्म किया है। जंगलों में 9.39 और सड़क किनारे 6.07 प्रतिशत मामलों में दुष्कर्म होने की बात सामने आई है।