पांच से छह माह तक देश और दुनिया से कटे रहने वाले हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के लोगों के लिए 35 वर्षों में पहली बार हेलीकॉप्टर की उड़ान नहीं हुई। यह अटल टनल रोहतांग के बनने से मुमकिन हुआ। जनजातीय जिले के लोगों के लिए टनल किसी वरदान से कम नहीं है। टनल खुलने से सरकार को लाहौल-स्पीति जिले के लिए पहली बार हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। इससे लाहौलवासियों को ही नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार को भी अभी तक करीब सवा करोड़ रुपये का फायदा हुआ। इससे पहले बर्फबारी के चलते जिले में फंसे लोगों और मरीजों को निकालने के लिए सरकार हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया करवाती थी।
बर्फबारी के सीजन में 35 से 40 उड़ानें कुल्लू से केलांग, पांगी, किलाड़, उदयपुर, काजा, स्तींगरी के लिए होती थीं। इस बार इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी। हालांकि इस बार लाहौल में बर्फबारी भी कम हुई है। ऐसे में घाटी का संपर्क देश व दुनिया से एक-दो दिन के लिए ही कटा। इस बार फरवरी में ही परिवहन निगम ने कुल्लू से केलांग के लिए बस सेवा शुरू कर दी है। अटल टनल से अब आवाजाही इतनी आरामदायक हो गई है कि घाटी के लोग अपना कामकाज निपटाकर शाम को ही वापस घर आ सकते हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि सर्दी के मौसम के लिए अटल टनल लाहौलवासियों के लिए वरदान साबित हुई है।
1985-86 से शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा
सेवानिवृत्त अधिकारी शेर सिंह शर्मा तथा शमशेर सिंह ने बताया कि लाहौल-स्पीति जिले में भारी बर्फबारी के चलते जरूरतमंद लोगों को बाहर निकालने के लिए हेलीकाप्टर सेवा 1985-86 से शुरू की गई। शुरुआत में सेना के हेलीकाप्टर की उड़ान होती थी, लेकिन बाद में प्रदेश सरकार ने अपनी निजी हेलीकाप्टर सेवा शुरू की। हर बार सर्दी के सीजन में 35 से 40 उड़ानें होती रहीं हैं। एक उड़ान में करीब ढाई से तीन लाख रुपये का खर्च आता है।