इन्वेस्टर मीट से पहले सरकार के विदेश दौरे के लिए पांच करोड़ रुपये का व्यय बजट तय हो गया है। इसके बावजूद सरकार की दुविधा यह है कि प्रदेश में एक बड़ा लैंड बैंक नहीं है। अगर विदेश से उद्योग आएंगे भी तो उन्हें जमीन कहां देंगे। यह बड़ी चुनौती होगी। हिमाचल प्रदेश में इन्वेस्टर मीट के यूं कैसे 85 हजार करोड़ रुपये की पूंजी का निवेश होगा। जर्मनी और नीदरलैंड 9 से 16 जून और यूएई में 24 से 27 जून तक निवेशकों को लुभाने के नाम पर विदेशी दौरे पर जाने की तैयारी जोरशोर से की जा रही है।
मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और पूरी टीम 9 जून को नई दिल्ली पहुंच जाएगा। 10 जून को पूरी टीम जर्मनी पहुंचेगी। इसके बाद यह टीम नीदरलैंड जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल ने धर्मशाला में आयोजित होने वाली इन्वेस्टर मीट में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए हिमाचल प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति 2019 को स्वीकृति प्रदान कर दी है। हिमाचल में औद्योगिक और अन्य सेवाएं क्षेत्रों की संतुलित प्रगति के लिए यह नीति अहम मानी जा रही है।
बड़े उद्योगों के लिए नहीं हिमाचल में पर्याप्त जमीन
बड़े उद्योगपतियों को आटो मोबाइल जैसे बड़े उद्योग लगाने होंगे तो कम से कम ढाई- तीन सौ एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति में सरकार के हाथ खड़े हो जाएंगे। शिक्षण संस्थान और स्वास्थ्य सेवा के प्रोजेक्ट चलाने होंगे तो इसके लिए निजी क्षेत्र की जमीन जुटानी पड़ेगी।
पंडोगा और कंदरोड़ी में भी नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए हैं परंतु यहां लैंड बैंक बड़ा नहीं है। चन्नौर में 200 कनाल जमीन जुटाई जा सकी है। राज्य के उद्योग निदेशक हंस राज कहते हैं कि सरकार ने लैंड बैंक रखा है। निजी क्षेत्र भी अपनी जमीन पोर्टल के माध्यम से बेच सकेंगे।