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हिमाचल: भारत के संविधान का प्रथम पृष्ठ टांकरी में लिखा, मंडी के पारूल अरोड़ा ने की पहल

Fri, 30 Jan 2026 11:34 AM IST
Krishan Singh देवेंद्र ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

 यह प्रयास न केवल टांकरी लिपि के पुनर्जीवन की दिशा में सार्थक है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय दस्तावेज से जोड़ने का भी प्रतीक बनकर उभरा है। 
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भारत के संविधान का प्रथम पृष्ठ टांकरी में लिखा। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 भारत के संविधान की मूल प्रति के प्रथम पृष्ठ को मंडी की पारंपरिक टांकरी लिपि में हस्तलिखित रूप में तैयार किया गया है। इस अनूठी पहल की शुरुआत मंडी के पारूल अरोड़ा ने की है। इसे सांस्कृतिक संरक्षण और भाषाई विरासत के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह प्रयास न केवल टांकरी लिपि के पुनर्जीवन की दिशा में सार्थक है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय दस्तावेज से जोड़ने का भी प्रतीक बनकर उभरा है।

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पारूल की ओर से तैयार इस हस्तलेख में संविधान की प्रस्तावना के आरंभिक शब्दों को उसी शैली में लिखा गया है, जैसी शैली कभी हिमाचल और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी फरमानों और ऐतिहासिक दस्तावेजों में प्रयुक्त होती थी। टांकरी लिपि सदियों तक हिमाचल में प्रशासनिक और साहित्यिक कार्यों की प्रमुख लिपि रही है। समय के साथ इसका प्रयोग लगभग समाप्त हो गया। पारूल का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक कलाकृति बनाना नहीं, बल्कि लोगों का ध्यान विलुप्त होती लिपियों की ओर आकर्षित करना है। मंडी के बुद्धिजीवी वर्ग दीनू कश्यप, प्रो. डीएन कपूर, प्रो. विजय विशाल का मानना है कि इस तरह के प्रयास युवाओं को पारंपरिक लिपियों को सीखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। पारूल अरोड़ा इससे पहले भी सैकड़ों साल पुरानी एक शिला में लिखी लाइनों का अनुवाद कर चुके हैं। 
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