एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने यह फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग और उसके ठेकेदार ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 24 का उल्लंघन किया है। निर्माण कार्य के दौरान नाले में फेंके गए मलबे के कारण नदी का पानी प्रदूषित हुआ। निचले हिस्से में स्थित फिश फार्म में हजारों ट्राउट मछलियों के अंडों की मौत हो गईं। एनजीटी ने मत्स्य विभाग, राजस्व अधिकारियों, ग्राम पंचायत और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आधिकारिक निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर यह फैसला दिया है। इन रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि निर्माण गतिविधियों के कारण पर्यावरण और फिश फार्म को गंभीर नुकसान पहुंचा है।