ड्रग्स तस्करी के मामले सुलझाने के लिए हिमाचल कोरिया और आस्ट्रेलिया की तर्ज पर फिंगरप्रिंट प्रोफाइल अपनाएगा। यानी अवैध तस्करी में पकड़े जाने वाले हर नशे के सामान के सैंपल जुटाकर इसकी फिंगर प्रिंट प्रोफाइलिंग होगी। ये एक तरह से डीएनए सैंपल रखने जैसी प्रक्रिया है। खासकर चरस, भांग और अफीम इत्यादि में ये काफी कारगर है।
फिंगर प्रिंट डाटाबेस लैब में तैयार होने के बाद पकड़ी गई चरस का टेस्ट करके ये पता लगाया जा सकेगा कि ये कहां बनी है और किस रूट से आई है? यानी इसकी क्वालिटी के आधार पर फिंगरप्रिंट बता देगा कि इसे कहां तैयार किया गया है? इससे जांच एजेंसियों को न केवल ऐसे केस सुलझाने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी पता किया जा सकेगा कि राज्य के किस क्षेत्र में कितना नशे का कारोबार हो रहा है?