सुबह और शाम के समय आवाजाही में लोगों को हो रही दिक्कतें, स्कूली बच्चे और कर्मचारी परेशान
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एचआरटीसी से अतिरिक्त बसें चलाने का किया आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मल्याणा-भट्ठाकुफर-ढली रूट पर एचआरटीसी की बसों की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि बसों की संख्या कम और सवारियां अधिक हैं। इस वजह से लोगों को मजबूरी में ओवरलोड बसों में सफर करना पड़ रहा है। इससे छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाली महिलाओं और बुजुर्गों को भी खासी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी सुबह और शाम के समय होती है। बसों की कमी के कारण स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों के साथ सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी पर्याप्त परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है। ढली, संजौली और आसपास के क्षेत्रों में निजी संस्थानों में काम करने वाले लोग रात के समय बसों की कमी के कारण पैदल अपने गंतव्य तक पहुंचने को मजबूर हैं। मल्याणा निवासी सुशील कुमार, रमन वर्मा और रमा ने बताया कि एचआरटीसी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बसों की कमी के बारे में कई बार अवगत करवाया जा चुका है। इसके बावजूद इस रूट पर बसों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है। इससे क्षेत्र की हजारों की आबादी को रोजाना अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। उन्होंने एचआरटीसी से मांग की है कि इस क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में बसें चलाई जाएं ताकि लोगों को आवागमन में राहत मिल सके।
शाम साढ़े पांच बजे के बाद नहीं मिलती बस
आईएसबीटी शिमला से वाया मैहली होकर ढली के लिए शाम साढ़े पांच बजे के बाद सीधी बस सेवा नहीं है। इस कारण चंडीगढ़ समेत अन्य जिलों से शाम और रात के समय आने वाले लोगों को ढली पहुंचने में भारी परेशानी होती है। मजबूरी में उन्हें आईएसबीटी से पहले पुराने बस अड्डे और फिर वहां से संजौली या ढली के लिए बस लेनी पड़ती है। स्थानीय लोगों ने आईएसबीटी से ढली के लिए रात के समय भी सीधी बस सेवा शुरू करने की मांग की है। एचआरटीसी लोकल डिपो शिमला के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुर वर्मा ने बताया कि मल्याणा-भट्ठाकुफर-ढली रूट पर नियमित रूप से बसें भेजी जाती हैं। निगम की पूरी कोशिश है कि बसों और स्टाफ की उपलब्धता के आधार पर इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।