पौंग के टापूपर नाव से पहुंचे निर्वाचन अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के फतेहपुर में पौंग डैम के बीच एक टापू है जिसमें अभी भी 125 से ज्यादा लोग रहते हैं। इनके यहां घर और खेत हैं। लगभग सात महीनों तक इस टापू के चारों तरफ पानी भरा रहता है। मात्र पांच माह ही लोग यहां बिना नाव के जा सकते हैं, जब पानी उतरता है। यहां के लोगों के पास ट्रैक्टर और बाइक भी हैं। यहां के बच्चे धमेटा में पढ़ते हैं और नाव से उनका आना-जाना होता है।
पौंग डैम के निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण के चलते ज्यादातर लोग यहां से पलायन कर चुके हैं लेकिन कुछ परिवार अभी भी पुश्तैनी जमीन में खेती कर रहे हैं और यहीं रह रहे हैं। इन्हें मुआवजा भी मिल चुका है। इस टापू की याद फतेहपुर विधानसभा उपचुनाव के समय आई है। मंगलवार को यहां के मतदाताओं को जागरूक करने और यहां बने बूथ में व्यवस्था देखने के लिए नोडल अधिकारी और बीएलओ नाव (बोट) से पहुंचे। 10 के करीब अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया। यहां 30 अक्तूबर को मतदान होगा।
निर्वाचन अधिकारी (एसडीएम) फतेहपुर अंकुश शर्मा ने बताया कि मंगलवार को नोडल अधिकारी, सेक्टर ऑफिसर तथा संबंधित क्षेत्रों के लिए नियुक्त बीएलओ नाव पर सवार होकर 105 सत्थ कुठेड़ा पोलिंग बूथ के मतदाताओं के घर पहुंचे। विधानसभा क्षेत्र का यह सबसे कम मतदाताओं का पोलिंग बूथ है, जो पौंग डैम टापू पर है। यहां पर मात्र 96 महिला तथा पुरुष मतदाता हैं।
निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि नोडल अधिकारियों व बीएलओ ने स्वीप कार्यक्रम के तहत पोलिंग बूथ के मतदाताओं को भी अधिक से अधिक मतदान करने के लिए जागरूक किया। उन्होंने बताया कि स्वीप कार्यक्रम के तहत मताधिकार का प्रयोग करने तथा चुनाव प्रक्रिया की समुचित जानकारी मतदाताओं तक पहुंचाने के अतिरिक्त मतदाताओं को लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदान करने के संकल्प की शपथ भी दिलाई गई। उन्होंने लोगों से लोकतंत्र में वोट के महत्व को समझते हुए मतदान में बढ़चढ़ कर भाग लेने की अपील की है।
टापू में न बिजली न पीने का पानी
इस टापू में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के लोगों के घरों में बैटरी वाले लैंप हैं, जिनके सहारे गुजर-बसर कर रहे हैं। नल भी नहीं हैं। केवल एक हैंडपंप है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि यहां के लोग परिवार गरीब हैं। यहां पौंग का पानी होने के चलते बेशुमार खेती होती है। यहां से निकले लोगों ने बाहर अच्छे घर डाले हुए हैं। कई बच्चे बाहर बड़े संस्थानों में पढ़ाई और नौकरी कर रहे हैं।