सरकार ने सेब बागवानों के लिए भले ही फसल बीमा योजना लागू की है, लेकिन रामपुर के सेब उत्पादकों को अभी तक इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। रामपुर क्षेत्र के सेब उत्पादकों का दुर्भाग्य यही है कि आज दिन तक बागवानों की समस्या को अनसुना किया जाता रहा है। इस साल ओलावृष्टि से करीब 30 से 40 फीसदी तक सेब की फसल तबाह हुई है।
बागवानों का कहना है कि रामपुर क्षेत्र में सेब का उत्पादन काफी बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में कई साल से ओलावृष्टि से सेब तैयार होने से पहले ही झड़ना आरंभ हो जाता है। इससे बागवानों को हर साल नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब बागवान सवाल उठाने लगे हैं कि जब प्रदेश के अन्य इलाकों में सेब को फसल बीमा योजना के तहत लाया गया है तो फिर रामपुर के बागवानों को इस लाभ से वंचित क्यों रखा गया है।
कई साल से रामपुर के आसपास के इलाकों में सेब पर ओलावृष्टि की मार पड़ती रही है। बागवान अपनी फसलों को चाहते हुए भी फसल बीमा योजना के तहत नहीं ला पाते। इस बार करीब दस पंचायतों में सेब की फसल ओलावृष्टि से तबाह हुई है। रामपुर क्षेत्र के बागवानों को बादल फटने से नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा लाभ दिया जाता है। ओलावृष्टि होने पर कोई बीमा सुविधा तक नहीं है। क्षेत्र में हर साल 25 से 30 लाख पेटी सेब की पैदावार सीजन में होती रही है। तूफान से 25 से 30 लाख तक का फसली नुकसान हो चुका है।
क्या कहना है विभाग का
बागवानी विभाग के एसएमएस एमएम चौहान कहते हैं कि बागवानों की समस्या यही रहती है कि रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा का लाभ नहीं मिल रहा है। यहां के बागवानों को बादल फटने से फसली नुकसान की भरपाई को फसल बीमा लाभ दिया जाता है। ओलावृष्टि से फसली नुकसान के कवर के लिए बीमा योजना का मामला सरकार से उठाया गया है।