प्रदेश सरकार आने वाले सेब सीजन से पहले बागवानी विभाग के उद्यान प्रसार केंद्रों से अनुदान पर मिलने वाले कीटनाशकों और दवाइयों की आपूर्ति बंद करने जा रही है। बागवानों को दवाएं निजी दुकानों से बाजार मूल्य से खरीदनी होंगी। बागवानी विभाग में बिल जमा करवाने के बाद सरकार बागवान के खाते में सब्सिडी की राशि जमा करवाएगी।
उद्यान उपनिदेशक मंडी अशोक धीमान ने इसकी पुष्टि की है। प्रदेश सरकार आगामी वित्त वर्ष में यह योजना लागू करने जा रही है। हिमाचल में बागवानी विभाग के अंतर्गत जिन बागवानों के उद्यान कार्ड बने हैं। उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। इससे विभाग की ओर से बागवानों से लिया जाने वाला हैंडलिंग चार्ज भी समाप्त होगा। जिसका सीधा लाभ बागवानों को मिलेगा। प्रदेश में किराए पर लिए स्टोरों के खर्चे पर भी इस योजना से विराम लगेगा।
इस तरह मिलेगा अनुदान
बागवानी विभाग सेब का उत्पादन करने वाले बागवानों को प्रति हेक्टेयर 4 हजार और गुठलीदार फलों का उत्पादन करने वाले बागवानों को प्रति हेक्टेयर 2 हजार रुपये अनुदान देगी। विभाग यह अनुदान बागवानों को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना के जरिये देगा।
355 उद्यान प्रसार केंद्र और पौध संरक्षण केंद्र
प्रदेश में बागवानी विभाग के 355 उद्यान प्रसार केंद्र और पौध संरक्षण केंद्र हैं। इन केंद्रों में दस प्रकार की दवाएं और कीटनाशक बागवानों को मिलते हैं। नाचन फ्रूट वेजिटेबल संघ के अध्यक्ष बीके ठाकुर ने सरकार के इस फैसले के स्वागत किया है। ठाकुर ने कहा की इस योजना से दवाओं से महरूम रहने वाले छोटे बागवानों को लाभ मिलेगा।