कोरोना संक्रमण के बीच लॉकडाउन ने बागवानी की कमर तोड़ दी है। कुल्लू जिले में स्ट्राबेरी कारोबार पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। जिले में तैयार होने वाली स्ट्राबेरी को पूछने वाला कोई नहीं। 90 फीसदी से अधिक स्ट्राबेरी को पर्यटक खरीदते थे। देश-विदेश से आने वाले हजारों पर्यटक स्ट्राबेरी को देखकर ही उसे खरीदते थे। स्ट्राबेरी का पूरा कारोबार ही पर्यटकों पर आधारित था।
स्ट्राबेरी को तोड़ने के बाद उसे अब किसानों को औने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। आमतौर पर स्ट्राबेरी 150 रुपये प्रतिकिलो तक बिकती है। इसकी पैकिंग छोटी होती है। इसलिए इसे आधा किलो की पैकिंग, 250 ग्राम की पेकिंग के हिसाब से बेचा जाता है। जिले के सीमांत क्षेत्र ज्वालापुर, मनाली में काफी अधिक मात्रा में स्ट्राबेरी की खेती की जाती है। जिन्हें लाखों का बीज लगाने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हो रहा है।
इसकी खेती से प्रदेश भर में सैकड़ों लोग जुड़े हैं। किसान अतुल वैद्य, हरबंस लाल वैद्य, कमली देवी, दुर्गी देवी, हुकम राम, राजेश गोयल ने कहा कि कोरोना के चलते इस बार नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि स्ट्राबेरी ज्यादा देर तक नहीं टिकती है। आठ घंटे के बाद यह खराब होने लग जाती है। इतने समय के अंदर इसे दिल्ली की मार्केट में पहुंचाना आसान नहीं है।
स्ट्राबेरी का कारोबार पर्यटकों पर आधारित रहता है। इसे खेतों से निकालने के बाद सीधे पर्यटकों को बेचा जाता था। लेकिन इस बार पर्यटक की संख्या शून्य है। ऐसे में उनके फल को खरीदने वाला कोई नहीं है। मजबूरी में उन्हें आधे से कम रेट में बेचनी पड़ रही है। इस संबंध में बागवानी विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ उतम पराशर ने कहा कि कोरोना के चलते इस बार किसानों-बागवानों को नुकसान उठाना पड़ा है।