खेतों में काम करते किसी उपकरण से किसान या खेतिहर मजदूर के अपंग व मौत होने पर उसे या उसके परिवार को बिना इंश्योरेंस भी 10 हजार से 1.50 लाख तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। उन्हें दो माह के अंतराल में खंड कृषि अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा।
मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के तहत किसान को यह लाभ मिलेगा। प्रदेश में लगभग एक वर्ष से इस योजना को लागू कर दिया गया है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण किसान इस योजना का लाभ नहीं उठ पा रहे हैं।
किसानों को यह मदद खेती में उपयोग होने वाली मशीनरी, औजार, उपकरण, ट्यूबवेल, ट्रैक्टर, पंपिंग सेट, पावर टिलर, थ्रैशर, ऊर्जा चलित हल, घास काटने की मशीन और बिजली के उपकरणों से चोट लगने पर ही मिलेगी। किसी भी कंपनी और ठेकेदार के मजदूर इस योजना में शामिल नहीं होंगे। बता दें कि हिमाचल में 80 फीसदी परिवार खेती-बागवानी से जुड़े हैं।
कहां करना होगा आवेदन- किसान और खेतिहर मजदूर का अंग कटने या मौत होने पर वह या उसका कानूनी वारिस हादसे के दो माह के अंदर मुआवजे की राशि का दावा कर सकता है। इसके लिए किसी इंश्योरेंस की जरूरत नहीं है। आवेदक को खंड स्तर के कृषि अधिकारी को इसका प्रमाण पत्र देना होगा। साथ ही पंचायत प्रधान का लिखित सत्यापन पत्र भी जमा करवाना होगा।
वर्ष 2015 की शुरुआत में इस योजना को शुरू किया गया है। अभी तक किसी भी किसान ने इसका लाभ नहीं उठाया है। इसके लिए किसी भी तरह की इंश्योरेंस की जरूरत नहीं है। यह आर्थिक सहायता सरकार की तरफ से दी जाएगी। - डॉ. वाईपी शर्मा, उप निदेशक कृषि विभाग, सोलन
किस तरह की चोट पर कितनी मिलेगी मदद
मौत होने पर================1.5 लाख
पीठ की हड्डी टूटने पर========50 हजार
हाथ और टांग दोनों टूटने पर=====40 हजार
एक हाथ या टांग टूटने पर=======30 हजार
चार उंगलियों के कटने पर=======20 हजार
एक उंगली या अंगूठा कटने पर====10 हजार