मक्की का समर्थन मूल्य 1425 से बढ़ाकर 1700 रुपये किया गया है। इसमें 275 रुपये का इजाफा किया गया है। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 1550 रुपये से बढ़ाकर 1750 रुपये किया गया है। इसमें 200 रुपये बढ़ाए गए हैं।
सूरजमुखी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1288 रुपये प्रति क्विंटल, रॉंगी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 997 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। ज्वार के समर्थन मूल्य को 1700 रुपये से बढ़ाकर 2430 रुपये किया गया है। मूंग के न्यूनतम मूल्य में 1400 रुपये की वृद्धि कर 5575 रुपये से 6975 किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से प्रदेश के किसान लाभान्वित होंगे।
हिमाचल में खरीफ फसलों में दो लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती होती है। इसी तरह से 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई होती है। दलहनें इससे कम क्षेत्र में होती हैं। यह जानकारी देते हुए कृषि निदेशक डा. देस राज शर्मा ने कहा कि प्रदेश में खाद्यान्नों की पैदावार घरेलू खपत के लिए ज्यादा होती है। सीमावर्ती क्षेत्रों के किसान इसे एफसीआई को भी बेचते हैं। उन्हें इसका लाभ होगा।
खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों मक्की, धान, अरहर, उड़द, कपास, आदि के समर्थन मूल्य घोषित किए जाने से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने माना कि हिमाचल की कृषि व्यवसाय से जुड़ी 90 फीसदी जनता को इसका फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की यह मांग पिछले दो दशकों से चली आ रही थी।
इस फैसले से देशभर के 12 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित वादा पूरा हुआ है। खाद्यानों की बात करें तो इनका सबसे ज्यादा उत्पादन खरीफ मौसम में ही होता है।
इनमें मक्की और धान की पैदावार सर्वाधिक होती है। इन फसलों सहित दालों और अन्य कृषि उपज का समर्थन मूल्य घोषित करने के बाद प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ी राहत मिली है।