बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत के बाद लीची को लेकर उड़ी अफ वाह के चलते अब कांगड़ा के बागवानों ने तुड़ान रोक दिया है। मंडियों में डिमांड कम होने और उचित दाम न मिलने के बाद कदम उठाया है। अब बागबान मामला थमने का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही इंतजार कर रहे हैं कि अब बाहरी राज्यों से लीची की मांग बढ़े तो उनके उत्पाद का सही दाम उन्हें मिल सके।
वहीं, जसूर के आढ़ती सब्जी मंडी एसोसिएशन के प्रधान रविंद्र गुलेरिया ने बताया कि जसूर सब्जी मंडी में प्रतिदिन 50 क्विंटल तक लीची आती है, लेकिन चमकी बुखार के चलते लोग लीची खाने से परहेज कर रहे हैं। अब चमकी बुखार की अफवाह के कारण सब्जी मंडियों में 15 से 20 क्विंटल तक ही लीची पहुंच रही है। इसके अलावा इस बार लीची के दामों में भी कमी आई है। लीची के व्यापारी रमेश कुमार ने बताया कि वह 10 वर्षों से व्यापार कर रहे हैं।
उन्होंने लीची के बाग का सौदा 40 से 50 रुपये किलो के हिसाब से किया था, जबकि आजकल उनकी लीची 25 रुपये के हिसाब से बिकी, जिस कारण इस बार लाखों का नुकसान उन्हें झेलना पड़ेगा। वहीं, यही हालत छतरौली के विक्की, बारला के सुरेंद्र पठानिया, जसूर के रजनीश, वासा के रविंदर पठानिया बयां कर रहे हैं। लीची के शौकीन रामगोपाल, महादेव, माधव, रजनी देवी व कपिल आदि ने बताया चमकी बुखार में लीची से हो रही मौतों की टीवी और अखबारों में आ रही खबरों के बाद वे लीची को डर के मारे छू नहीं रहे हैं।
कांगड़ा में नहीं आया है कोई भी मामला: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा गुरदर्शन गुप्ता का कहना है कि जिला कांगड़ा में चमकी बुखार से संबंधित एक भी मामला सामने नहीं आया है। फिर भी विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि लोग अपने आसपास साफ-सफाई रखे और मच्छर को न पनपने दें।