हिमाचली लहसुन के विदेशी भी मुरीद हो गए हैं। दर्जन भर देशों से हिमाचली लहसुन की खूब मांग है। चीन के बाद अब इंडियन गारलिक को इंग्लैंड और अमेरिका सहित दुनिया के कुछ अन्य देशों में भी निर्यात किया जा रहा है। इसमें हिमाचल के लहसुन की खास मांग है। इसकी सबसे बड़ी वजह हिमाचली लहसुन की ज्यादा शेल्फ लाइफ और गुणवत्ता है।
प्रदेश में 40 हजार मीट्रिक टन तक उत्पादन होता है। सिरमौर और कुल्लू जिले को लहसुन बेल्ट माना जाता है। सिरमौर में सबसे ज्यादा लहसुन उगाया जाता है जबकि हिमाचल में कुल्लू दूसरे पायदान पर है। खास बात है कि हिमाचली लहसुन को उगाते समय किसान कीटनाशक और खाद का बेहद कम उपयोग करते हैं। यहां की मिट्टी, जलवायु और आबोहवा लहसुन की खेती को अन्य इलाकों से अलग करती है।
हिमाचली लहसुन की मांग दक्षिण भारत में काफी ज्यादा रहती है। ऐसे में किसानों को दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति मार्केट कमेटी के सचिव सुशील गुलेरिया बताते हैं कि इस साल हिमाचली लहसुन की मांग विदेश में भी काफी ज्यादा है। इससे किसानों को अच्छे दाम मिले हैं।
व्यापारियों का कहना है कि इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, मलयेशिया, बांगलादेश, थाईलैंड और पाकिस्तान सहित दर्जनों देशों को निर्यात होता है। कृषि उपनिदेशक राजपाल शर्मा कहते हैं कि सूबे का लहसुन अन्य राज्यों के अपेक्षा अधिक टिकाऊ और गुणवत्ता युक्त होता है। इससे दवाएं भी बनाई जाती हैं। प्रदेश में करीब चार हजार हेक्टेयर भूमि पर लहसुन का उत्पादन होता है।