फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Himachal Pradesh: सेब बागवान संगठनों की सरकार से मांग, कार्टन पर माफ किया जाए जीएसटी

Mon, 06 Jun 2022 02:31 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हरीश चौहान ने कहा कि कार्टन और ट्रे की कीमतें बेलगाम हो गई हैं। इन पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। जनवरी में केंद्र सरकार के बजट से पूर्व प्री बजट मीटिंग में कार्टन पर जीएसटी माफ करने का मामला उठाया था।
विज्ञापन
हरीश चौहान, अध्यक्ष, फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सेब सीजन शुरू होते ही कार्टन और पैकिंग ट्रे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से बागवानों की परेशानी बढ़ गई है। महंगाई से सेब उत्पादन की लागत बढ़ रही है और कमाई घट रही है। सूखे की मार से बागवान पहले ही परेशान थे, उस पर कार्टन और ट्रे की बढ़ी कीमतों ने समस्या और बढ़ा दी है। बीते साल के मुकाबले इस साल कार्टन की कीमतों में करीब 18 फीसदी और पैकिंग ट्रे की कीमतों में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बीते दो साल के भीतर कार्टन की कीमतें 25 से 30 रुपये, जबकि पैकिंग ट्रे की कीमतें 250 से 275 रुपये तक बढ़ी हैं। महंगाई की मार से राहत के लिए बागवान संगठन सरकार से कार्टन पर जीएसटी माफ करने की मांग उठा रहे हैं।

विज्ञापन


कमाई तो दोगुनी हुई नहीं, लागत जरूर डबल हो गई
कार्टन और ट्रे की कीमतें बेलगाम हो गई हैं। इन पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। जनवरी में केंद्र सरकार के बजट से पूर्व प्री बजट मीटिंग में कार्टन पर जीएसटी माफ करने का मामला उठाया था। बावजूद इसके कोई राहत नहीं मिली। सरकार को तुरंत कार्टन पर जीएसटी पूरी तरह खत्म करने का फैसला लेना चाहिए। - हरीश चौहान, अध्यक्ष, फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ

कृषि बागवानी में अनुदान खत्म कर सरकार कारपोरेट खेती को बढ़ावा दे रही है। कार्टन, ट्रे, खादों और कीटनाशकों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। कार्टन पर जीएसटी 12 से 18 फीसदी कर दिया है। बागवानों के एमआईएस के करोड़ों रुपये सरकार पर बकाया है। अनुदान बहाल कर बागवानों को बकाया का तुरंत भुगतान किया जाए। - संजय चौहान, संयोजक संयुक्त किसान मंच, हिमाचल प्रदेश
विज्ञापन


पैकिंग सामग्री की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि सरकार की संवेदनहीनता और बागवान संगठनों की निष्क्रियता का परिणाम है। बागवानी क्षेत्र के प्रति सरकार का रवैया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण रहा है। सरकार लगातार बागवानों की अनदेखी कर रही है। बागवान संगठन भी अपने निजी हितों के लिए सरकार को जरूरी चुनौती नहीं दे पाए हैं। - सुरेंद्र ठाकुर, अध्यक्ष, यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन

कार्टन और ट्रे की बढ़ती कीमतों से हालात इतने खराब हो गए हैं कि बागवानी छोड़ने की स्थिति पैदा हो गई है। लागत बढ़ने और कमाई घटने से बागवानी घाटे का सौदा बन गई है। छोटे और मध्यम बागवानों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। सरकार को कार्टन के स्थान पर क्रेट में सेब बेचने की व्यवस्था करनी चाहिए। - संजीव ठाकुर, अध्यक्ष, छौहारा वैली एपल ग्रोवर्स सोसायटी

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें