हिमाचल के बागवान अब सेब, आम, नाशपाती और अन्य फलदार पौधों के साथ-साथ इनकी कलमें (बडवुड) भी बिना पंजीकरण नहीं बेच पाएंगे। ऐसा करने पर उन्हें तीन साल की कैद और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। प्रदेश सरकार जल्द ही इसके लिए पौध नर्सरी अधिनियम के नए नियम बनाने जा रही है।
हिमाचल के कई ऐसे बागवान हैं जो हर साल लाखों रुपये की सेब की कलमें बिना पंजीकरण बेचते हैं। प्रदेश में 350 के करीब सेब की देशी-विदेशी किस्में उगाई जा रही हैं। हिमाचल सरकार ने हाल ही में पौध नर्सरी अधिनियम में संशोधन किया है। एक्ट में संशोधन के बाद अब इसके नए नियम बनाए जा रहे हैं।
नियमों में बडवुड बैंक की स्थापना का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके तहत राज्य के बागवान बिना पंजीकरण के कलमें नहीं बेच सकेंगे। बागवानों में सेब की अच्छी किस्में उगाने को खासा क्रेज है। बागवान अच्छे आकार, रंग और शेल्फ लाइफ से युक्त किस्मों को ही उगाना चाहते हैं।
इससे उन्हें मार्केट में फल के अच्छे रेट मिलेंगे। नियमों में बडवुड बैंक बनाकर रोगरहित और कुछ खास किस्मों की कलमें बेचने के लिए ही बागवानों को अधिकृत किया जाएगा। इन्हें निर्धारित से अधिक रेट पर नहीं बेचने की भी व्यवस्था की जा सकती है।
क्या होती हैं कलमें
कलमें अच्छी किस्मों के पौधों की पतली-पतली टहनियां होती हैं। इन्हें परंपरागत किस्मों पर ग्राफ्ट किया जाता है। सेब के पेड़-पौधों पर जिस भी किस्म की कलमें की जाएंगी, वही उसी किस्म का फल देगी।
विदेशों से पौधे मंगवाकर भी बेची जा रहीं कलमें
प्रदेश में बागवान विदेशों से पौधे मंगवाकर उनसे कलमें निकालकर भी बेच रहे हैं। ये कलमें रेड विलोक्स, जेरोमाइन, सुपर चीफ, स्कारलेट स्पर टू, गेल गाला आदि तमाम किस्मों की बेची जा रही हैं। कई किस्मों की एक फीट की कलम को 200 से 500 रुपये तक भी बेचा जा रहा है। हिमाचल के बागवान हर साल 4000 करोड़ के फलों का उत्पादन देश-विदेश में करते हैं। इनमें 3200 करोड़ का कारोबार अकेले सेब से होता है।
पौध नर्सरी एक्ट में संशोधन के बाद अब इसके नियमों में भी संशोधन किया जा रहा है। नियमों में पंजीकृत बडवुड बैंक से निकालकर ही कलमें बेचने का प्रावधान होगा। ऐसा न करने पर सजा, जुर्माने का भी प्रावधान होगा।-डा. डीपी भंगालिया, निदेशक, हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग