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Fake Degree Case: हाईकोर्ट में अंतिम चालान पेश, मानव भारती विवि के संचालक सहित 10 लोगों को बनाया आरोपी

Mon, 08 Jan 2024 06:38 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

विश्वविद्यालय पर 46,000 फर्जी डिग्रियां बेचने का आरोप है। एसआईटी का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। 
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फर्जी डिग्री मामला(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मानव भारती निजी विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने हाईकोर्ट में अंतिम चालान पेश कर दिया है। इनमें विश्वविद्यालय के संचालक राजकुमार राणा, उसकी पत्नी समेत 10 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया है। फोरेंसिक लैब जुन्गा से सैंपल की रिपोर्ट आने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद एसआईटी ने चालान पेश किया है। विश्वविद्यालय पर 46,000 फर्जी डिग्रियां बेचने का आरोप है।

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एसआईटी का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। लैब को भेजे गए फर्जी डिग्रियों के नमूने और उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट की जांच में पाया गया कि दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ हुई है। जांच में पाया गया कि कई राज्यों में फर्जी डिग्रियां बेची गईं। इन राज्यों में महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, केरल, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और बंगलूरू शामिल हैं। आरोप है कि डिग्रियां बेचने का यह फर्जीवाड़ा 2010 से चल रहा था।

केवल 2,600 डिग्रियां ही सही
शैक्षणिक सत्र पूरा होने के बाद फर्जी डिग्रियां बिकना शुरू हो जाती थीं। एजेंट डिग्रियों का सौदा कर पैसों का नकद लेनदेन करते थे। हाईकोर्ट की ओर से गठित टीम ने पाया कि विश्वविद्यालय की केवल 2,600 डिग्रियां ही सही हैं। यही नहीं, आरोप यह भी है कि विश्वविद्यालय ने ऐसे कोर्स भी करवा दिए, जिनकी विवि प्रबंधन ने अनुमति ही नहीं ली थी। उल्लेखनीय है कि फर्जी डिग्री मामले में मुख्य आरोपी राजकुमार राणा की पत्नी ऑस्ट्रेलिया में है। उसे भी आरोपी बनाया गया है।

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