शिमला जिला के कई क्षेत्रों की आराध्य ज्येश्वरी देवी धरेच का केलिया स्थित मंदिर में दुर्गा पूजन मेले 20 अक्तूबर से शुरू होंगे। 27 अक्तूबर तक मेले के दौरान मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। मंदिर प्रबंधन की ओर से अष्टमी से पूर्णिमा तक सात दिन तक नवजात शिशुओं के मुंडन संस्कार होंगे। देवी दर्शन के लिए मंदिर को खुला रखे जाने का फैसला लिया है।
इस बार मेले की यह विशेषता रहेगी कि यहां पर पशु बलि नहीं होगी। सैकड़ों बकरों की जगह इस बार नारियल बलि से प्रथा का निर्वहन होगा। हाईकोर्ट द्वारा पशु बलि पर रोक लगाए जाने के बाद देवी के 18-20 सौ कलेणों द्वारा देवी की आज्ञा के बाद यहां बकरों की बलि को पूर्णतया बंद कर दिया है। मंदिर प्रबंधन समिति ने मेले की तैयारियां आरंभ कर दी हैं। हर काम के लिए अलग से कमेटी बनाई जा रही है।
मंदिर समिति द्वारा पुलिस प्रशासन का भी सहयोग मांगा है। गौरतलब है कि धरेच देवी का यह मेला केलिया में हर साल शरद नवरात्रों की अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है। नवरात्रों के दौरान मंदिर में खूब भीड़ होती है। देवी धरेच के वजीर सीताराम शर्मा और भंडारी लच्छीराम ने बताया कि इस अवसर पर लोगों द्वारा मंदिर में बच्चों के मुंडन संस्कार आदि करवाने की परंपरा है। धरेच मंदिर में मुख्य दशहरा उत्सव 23 अक्तूबर को होगा।
केलिया मंदिर में 20 को आएंगी देवी
देवी ज्येश्वरी 20 अक्तूबर को अपने मूल मंदिर धरेच से केलिया मंदिर में आएंगी। सात दिन तक यहां वास करेंगी। श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करेंगी। 27 अक्तूबर शाम को देवी देवलुओं सहित अपने मूल मंदिर धरेच लौट जाएगी।