आईजीएमसी के नेत्र रोग विभाग ने ट्रांसप्लांट की आंखें, घर आकर चिकित्सकों की टीम निकालती हैं आंखों से कॉर्निया
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मधुमेह और ब्लड प्रेशर के मरीज भी कर सकते हैं नेत्रदान अमर उजाला ब्यूरो शिमला। मृत्यु के बाद भी आपकी आंखें इस संसार को देख सकती हैं। इसके लिए परिजनों की मदद से मृत्यु के बाद किसी भी व्यक्ति का नेत्रदान किया जा सकता है। इससे दृष्टिबाधित लोगों को एक नई जिंदगी मिल सकती है। ऐसा ही कुछ 390 लोगों ने बीते दिनों में किया है।
मृत्यु से पहले ही यह लोग नेत्रदान करने की शपथ लेकर गए थे। इनकी जब मृत्यु हुई, तो परिजनों ने स्वयं आईजीएमसी नेत्र बैंक (आई बैंक) में इसकी जानकारी दी। इसके बाद टीम ने घर जाकर कॉर्निया को सुरक्षित रूप से कलेक्ट किया। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में 390 दृष्टिबाधितों को संसार दिखाने के लिए लोग मृत्यु के बाद अपनी आंखों की रोशनी दे गए। इसके बाद से यह लोग दुनिया देख रहे हैं और अपना कामकाज भी कर रहे हैं। नेत्र विभाग के अनुसार वर्ष 2010 से अभी तक 460 लोगों ने मृत्यु के बाद नेत्रदान किया है। हालांकि इनमें से 390 लोगों को ही यह नेत्र लग पाए हैं। खराब होने और कुछ अन्य तकनीकी कारणों के चलते कुछ आंखें रिजेक्ट भी हुई हैं। खास बात यह है कि चश्मा पहनने वाले, मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवा चुके, मधुमेह (डायबिटीज) और ब्लड प्रेशर के मरीज भी नेत्रदान कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में पूरी आंख का प्रत्यारोपण नहीं होता, बल्कि केवल आंख की सबसे ऊपरी पारदर्शी परत जिसे कॉर्निया कहते हैं, उसे ही प्रत्यारोपित किया जाता है।
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आईजीएमसी के नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामलाल शर्मा ने बताया कि अस्पताल के आई बैंक में जरूरतमंदों को नेत्र लगाने के लिए ट्रांसप्लांट किया जाता है। अब तक 390 सफल ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। नेत्रदान हमेशा मृत्यु के बाद ही होता है। मृत्यु के करीब छह घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। एक से लेकर 100 वर्ष तक का कोई भी व्यक्ति नेत्रदान करने में सक्षम है। अस्पताल के अलावा नेत्रदान घर पर भी किया जा सकता है, जहां मेडिकल टीम मृत व्यक्ति के शरीर से नेत्र (कॉर्निया) निकालकर सुरक्षित रख लेती है।
ऐसे भर सकते हैं फॉर्म नेत्र दान के लिए लोग अपने नजदीकी आई बैंक, अस्पताल या विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन या ऑफलाइन संकल्प फॉर्म भरा जा सकते हैं। पंजीकरण के बाद डोनर को एक डोनर कार्ड दिया जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि अपने इस निर्णय के बारे में परिवार को जरूर जानकारी दें, क्योंकि मृत्यु के बाद अंतिम निर्णय और सहमति उन्हीं की होती है।
निधन होने पर यह करें
परिवारजन नेत्रदान के लिए सहमति दे देते हैं, तो शव वाले कमरे के पंखे तुरंत बंद कर दें ताकि आंखें सूखने से बची रहें। मृतक की दोनों आंखें धीरे से बंद कर दें और उनके ऊपर साफ गीली रुई या पट्टी रख दें। तकिये की मदद से मृतक के सिर को धड़ से थोड़ा ऊपर (लगभग 6 इंच) उठाकर रखें।