फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां मक्खन के बकरे की दी जाती है बलि

Fri, 31 Oct 2014 03:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट द्वारा पशु बलि पर लगाई गई रोक के बाद कुल्लू व लाहुल-स्पीति में भी पशु बलि प्रथा पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। न्यायालय का सम्मान करते हुए जिला लाहुल-स्पीति में भी इन दिनों देवता घेपन के समक्ष मक्खन का बकरा बनाकर पुरानी परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है।
विज्ञापन


लाहुल-स्पीति के आराध्य देवता राजा घेपन इन दिनों लाहुल के गांवों में जाकर भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हैं। तीन साल बाद अपने मंदिर से निकल कर गांव-गांव जाकर भक्तों को आशीर्वाद देने की यह प्रथा यहां सर्दियों पुरानी है। लाहुल-स्पीति के निवासी एवं प्रसिद्ध इतिहासकार छेरिंग दोरजे बताते हैं कि जब राजा घेपन अपने स्थाई निवास से निकलते हैं तो वे घाटी के हर गांव का दौरा करते हैं।

देवता राजा घेपन का हर गांव में पहुंचने पर उनके भक्तों द्वारा पारपंरिक कबायली परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया जाता है। इस दौरान पहले बलि प्रथा की परंपरा निभाई जाती थी लेकिन अब उच्च न्यायालय द्वारा बलि प्रथा पर प्रतिबंध के बाद से इस वर्ष भक्तों द्वारा मक्खन के बकरे बनाकर देवता को चढ़ाए जा रहे हैं।
विज्ञापन


हालांकि पहले भी बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग जो पशु बलि नहीं देते हैं वे मक्खन के बकरे बनाकर चढ़ाते रहे हैं लेकिन इस बार सभी लोगों द्वारा यहां देवता के समक्ष मक्खन के बकरे बनाकर चढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए घर में तैयार किए गए या बाजार से लाए गए मक्खन को बकरे की शक्ल दी जाती है जिसे राजा घेपन को चढ़ाया जाता है।

इसके अलावा चांदी के भी बकरे बनाए जा रहे हैं और साथ में नारियल भी चढ़ रहा है। दूसरी ओर प्रशासन द्वारा भी किसी गांव में कोई पशु बलि न हो इसके लिए गुप्त रूप से कुछ कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है जो इन मामलों पर नजर रख रहे हैं।

घर में तैयार किए गए मक्खन से बकरा बनाकर उसे राजा घेपन को चढ़ाया जाता है। इसके अलावा चांदी के भी बकरे बनाए जा रहे हैं और साथ में नारियल भी चढ़ रहा है। पशु बलि प्रथा अब पूरी तरह बंद है।
विज्ञापन

पूर्ण चंद, प्रधान, राजा घेपन मंदिर कमेटी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें