हिमाचल प्रदेश में शराब माफिया के फलने-फूलने का कारण आबकारी एवं कराधान विभाग की मेहरबानी भी है। वर्ष 2021-22 में पकड़े अवैध शराब के बड़े मामलों के तार भी मंडी जिले में बिकी जहरीली शराब से जुड़े हो सकते हैं। इन मामलों में टैक्स और जुर्माने की वसूली के बाद आबकारी विभाग ने आगामी जांच से इतिश्री कर ली है।
पिछले वर्ष कांगड़ा और ऊना में होलसेल गोदामों में बिना लाइसेंस फीस 10 हजार से ज्यादा पेटियां गायब हो चुकी हैं। जुर्माने की कार्रवाई के बाद विभाग इस तह तक नहीं पहुंचा कि आखिरकार यह शराब कहां गई? कहीं इसे खाली बोतलों को रिफिल कर गोलमाल तो नहीं किया जाता रहा? सिरमौर के कालाअंब में आबकारी विभाग के नकली होलोग्राम भी पकड़े जा चुके हैं। इनका इस्तेमाल कहां-कहां किया जाता रहा और कहां होना था।
इस जांच से भी विभाग के अधिकारी जुर्माने और टैक्स की वसूली के बाद खामोश हैं। सिरमौर और मंडी में शराब फैक्ट्रियों से हजारों लीटर ईएनए स्प्रिट भी बरामद हो चुका है, जिससे सैकड़ों पेटियां अवैध शराब की बन सकती हैं। जुलाई 2021 में विभाग की टीम ने पांवटा में एक फैक्ट्री में करीब 13 हजार लीटर ईएनए (एक्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल) बरामद किया। इससे पांच हजार से अधिक शराब की पेटियां तैयार की जा सकती थीं। 18 जनवरी, 2022 को मंडी जिले में एक बॉटलिंग प्लांट से भी 11 से 12 हजार स्प्रिट पकड़ा गया है। इससे भी पांच हजार शराब की पेटियां तैयार की जा सकती थीं।
उधर, आबकारी एवं कराधान विभाग के आयुक्त यूनुस खान के अनुसार पिछले कुछ समय से विभाग विभिन्न बॉटलिंग प्लांट्स की जांच कर रहा है। अनियमितताओं के चलते एक सप्ताह पहले ही सोलन में एक बड़ी कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई है। सिरमौर में भी एक प्लांट के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मंडी के मामले में पूरी जानकारी आने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।