फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Iranian Garlic: दिल्ली मार्केट में ईरानी लहसुन की एंट्री, हिमाचल को दे रहा टक्कर

Thu, 10 Aug 2023 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)

सार

 ईरानी लहसुन की खासियत यह है कि इसका आकार मोटा है और ये क्रेट में पैक होकर आ रहा है। इस समय इसके दाम 150 से 160 रुपये तक मिल रहे हैं।
विज्ञापन
ईरानी लहसुन - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली में ईरानी लहसुन की आवक से हिमाचली फसल को टक्कर मिल रही है। बीते हफ्ते तक हिमाचल का लहसुन दिल्ली में 150 रुपये तक बिका। अब इसके दाम 130 से 140 रुपये पहुंच गए हैं। ईरानी लहसुन की खासियत यह है कि इसका आकार मोटा है और ये क्रेट में पैक होकर आ रहा है। इस समय इसके दाम 150 से 160 रुपये तक मिल रहे हैं। वहीं कश्मीरी समेत देश के अन्य हिस्सों से भी लहसुन बाजार में आने से इसका सीधा असर दाम पर पड़ा है। कश्मीरी 105-135 और मध्यप्रदेश के छीपाबड़ाैद के लहसुन को भाव 120-130 रुपये तक है।

विज्ञापन


देश के बाकी हिस्सों से भी फसल मंडी में पहुंच रही है। इससे दामों में स्थिरता आ गई है। हालांकि इस बार जिला सिरमौर के लोगों को लिए लहसुन का कारोबार फायदे का सौदा रहा। पिछले साल के मुकाबले इस बार अच्छे दाम मिले हैं। बीते साल लहसुन की फसल को अधिकतम 70 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिले। इस बार शुरूआती दौर में ही हिमाचल का लहसुन चमका। इसके बाद उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन ए ग्रेड का लहसुन 110 रुपये से कम नहीं आया।

नौहराधार के आढ़ती रविंद्र चौहान ने बताया कि इस समय लहसुन को 130 से 140 रुपये प्रति किलो भाव मिल रहा है। इस बार फसल को अच्छे दाम मिले हैं। शिलाई कफोटा के किसान संदीप ने बताया कि उन्होंने पिछले हफ्ते दिल्ली में 158 रुपये के हिसाब से लहसुन बेचा। अब दाम कम हुए हैं। ईरानी लहसुन दिल्ली की मंडियों में पहुंचा है। कश्मीरी समेत मध्यप्रदेश और दूसरे हिस्सों का लहसुन भी बाजार में आ रहा है। इससे दाम घट-बढ़ रहे हैं। ज्यादातर दामों में स्थिरता बनी हुई है।
विज्ञापन


जिला सिरमौर में प्रदेश में सबसे ज्यादा 4,000 हेक्टेयर रकबे पर लहसुन की खेती हो रही है। इस मर्तबा 60,400 मीट्रिक टन पैदावार का अनुमान है। अब लहसुन का सीजन भी अंतिम चरण में है। बरसात में लहसुन खराब होने और पंपिंग के आसार बनने से इसे बेचना जरूरी है। लिहाजा किसान और आढ़ती फसल को निकालने में जुटे हैं।
विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें