पेपर मिलों की मनमानी पर गत्ता उद्योग संचालकों ने तेवर तल्ख किए हैं। लगातार बढ़ रहे पेपर के दामों के बाद गत्ता उद्यमियों ने बढ़े हुए रेट पर गत्ते के डिब्बे बेचने का ऐलान किया है।
बैठक में गत्ते के चार से पांच रुपये प्रतिकिलो दाम बढ़ाने पर सहमति बनी। मौजूदा समय में 25 से 35 रुपये किलो गत्ता बिक रहा है। आने वाले दिनों में यह दाम बढ़ जाएंगे।
प्रदेश में 250 गत्ता उद्योग हैं। इनमें हर सेब सीजन में पांच करोड़ डिब्बे तैयार होते हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश जैन की अध्यक्षता में बद्दी में हुई बैठक में लगातार पेपर मिलों की हड़ताल पर चिंता जताई गई।
उद्यमियों ने कहा कि दो माह में पांच रुपये पेपर के रेट बढ़ा दिए हैं। बेंडर गत्ते के डिब्बे वही पुराने रेट पर दे रहे हैं। उसके लिए उन्हें छह माह का इंतजार करना पड़ता है।
फैसला लिया गया कि अब गत्ता संचालक अपने गत्ते के डिब्बे को बढ़े हुए रेट पर बेचेंगे। बीबीएन के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि पेपर के अलावा एलपीजी, बिजली और अन्य सामान के रेट बढ़े हैं।