राजाओं के समय से चल रहे मेले का स्वरूप बदल चुका है। पहले मेले में पशुओं का कारोबार होता था। अब तो यहां पूजा के लिए भी प्रशासन को बैल तलाश कर लाने पड़ते हैं। राजाओं के समय में मेला आपसी मेल-मिलाप के लिए शुरू किया था।
राजाओं के समय से ही नलवाड़ी मेला दंगल के लिए मशहूर था। यहां उत्तर भारत के नामी अखाड़ों से सैकड़ों पहलवान आते हैं। हिम कुमार और बिलासपुर केसरी के नाम से यहां विजेताओं को सम्मानित किया जाता है।