त्यौहारी सीजन में नगर निगम की सड़कें बिकनी शुरू हो गई हैं। शहर के बाजारों के हिसाब से सड़कों के रेट फाइनल कर दिए हैं। दीवाली को अभी दस दिन बाकी हैं लेकिन अभी से बाजारों में नगर निगम की सड़कों पर अस्थाई दुकानें (फड़ी) सजनी शुरू हो गई हैं। फड़ी लगाने के लिए सड़कों की खरीद फरोख्त का काम जोरों पर है। दुकान के सामने सड़क पर फड़ी लगाने के एवज में 300 से 1200 रुपये प्रतिदिन मांगे जा रहे हैं।
शहर की सड़कों की मेंटेनेंस देखने वाला नगर निगम प्रशासन गहरी नींद सोया है। त्योहारी सीजन के चलते बाहरी राज्यों से अस्थाई दुकानें लगाने वाले शिमला पहुंच चुके हैं। शहर के बाजारों में नगर निगम की सड़कों पर फड़ी सजना शुरू हो गई हैं। उपनगरों में भी ऐसी ही स्थिति है। शहर के सबसे व्यस्ततम लोअर बाजार में फड़ी लगाने के रेट सबसे अधिक हैं। शहर के छोटे बाजारों में भी स्थिति ऐसी ही है।
सेटिंग करने के लिए दलाल सक्रिय
फड़ी लगने के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं और खरीददारी करने आ रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी में फड़ी लगाकर कारोबार करने बाहरी राज्यों से एक हजार से अधिक लोग पहुंच चुके हैं। दीवाली के नजदीक इनकी संख्या दुगनी होने की संभावना है। इनमें अधिकतर लोग फ्रूट, पेठा, घरों की साज सज्जा का सामान और सजावटी लाइटें बेच रहे हैं। नगर निगम के आयुक्त अमरजीत सिंह का दावा है कि अवैध रूप से फड़ी लगाकर सामान बेचने वालों को सख्ती से हटाया जाएगा। लोगों को दिक्कत पेश नहीं आने दी जाएगी।
त्योहारी सीजन के चलते राजधानी में दलाल सक्रिय हो गए हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले लोग दलालों के माध्यम से दुकानदारों से संपर्क कर फड़ी लगाने के लिए जगह का बंदोबस्त कर रहे हैं। इसके एवज में दलालों को कमीशन मिल रहा है। शहर में कुछ स्थानों पर तो दलालों का ही कब्जा है, यहां बाहरी राज्यों के लोगों को बिठा कर ये मोटा किराया वसूल रहे हैं।
इन दरों पर हो रही वसूली
लोअर बाजार------1000 से 1200 रुपये
राम बाजार--------800 से 1000
मिडल बाजार------600 से 800
लक्कड़ बाजार-----500 से 600
संजौली-----------500 से 600
कसुम्पटी----------500 से 600
बालूगंज-----------300 से 500 रुपये प्रतिदिन
इसके अलावा-------12 से 15 हजार रुपये
(एक हफ्ते से दस दिन तक का ठेका हो रहा है)
आपातकालीन स्थिति में क्षति का अधिक खतरा
दीवाली से पहले शहर की सड़कों पर बाजारों में अवैध कारोबार शुरू हो गया है। बाहरी क्षेत्रों से आए कारोबारियों ने सड़कों पर कब्जा कर लिया है। हालात इतने गंभीर है कि बाजारों में लोगों के चलने तक के लिए जगह खाली नहीं बची है। आपातकालीन स्थिति में बचाव दल, अग्निशमन यहां तक की एंबुलेंस का भी घटना स्थल तक पहुंचना संभव नहीं है। नगर निगम की लापरवाही से आगजनी अथवा किसी अन्य आपदा की स्थिति में जानमाल का भारी नुकसान होने का अंदेशा है।