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फल-सब्जियों को बचाएंगी प्लास्टिक की खाली बोतलें, प्लाई बोर्ड के टुकड़े

Wed, 14 Sep 2016 11:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
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फल और सब्जियों को नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खी कीट किसानों व बागवानों की मेहनत को अब चौपट नहीं कर सकेंगी। प्लास्टिक की खाली बोतलें और प्लाई बोर्ड के टुकड़े (लकड़ी) अब फसलों को बचाएंगे। बिना कीटनाशक फल मक्खी कीट से फसलों को सुरक्षा कवज मुहैया कराने में कृषि विवि पालमपुर और कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के वैज्ञानिकों को सफलता मिली है।
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शोध के बाद इन वैज्ञानिकों ने सोलर ट्रैप तैयार किया है। इस ट्रैप में नर मक्खी लगभग 200 मीटर की दूरी से खींची चली आती है। यह ट्रैप प्लास्टिक की खाली बोतल से बनाया है। बोतल में ऐसे केमिकल गंध प्लाई बोर्ड के टुकड़े रखे जाते हैं जिससे प्राकृतिक तौर पर नर मक्खियां मादा मक्खियों की ओर आकर्षित होकर बोतल में चली जाती हैं। ये नर मक्खियां बोतल में डाले गए छिद्रों से बोतल में जाकर मर जाती हैं।

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद का कहना है कि प्रति बीघा दो बोतलें किसी छड़ी या तार से खेतों में लटकाई जा सकती हैं। दो बोतलों से लगभग 400 वर्ग मीटर क्षेत्र समाविष्ट हो जाता है। इस ट्रैप की कीमत मात्र 100 रुपये है और कृषि विभाग के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुदान के साथ किसान इसे विक्रय केंद्रों से ले सकते हैं।
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इन्होंने किया शोध
कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में कार्यरत तीन वैज्ञानिकों ने करीब चार साल के शोध के बाद फल मक्खी कीट का तोड़ ढूंढने में कामयाबी हासिल की है। शोध करने वालों में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक डॉ. पीके मेहता, डॉ. पंकज सूद और चंद्रशेखर प्रभाकर शामिल हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस वर्ष हिमाचल दिवस पर वैज्ञानिकों के समूह को राज्य स्तरीय खोज पुरस्कार से सम्मानित भी किया है।

ऐसे नुकसान पहुंचातीं हैं मक्खियां
मादा मक्खियां फलों, फूलों व पौधों के अग्र भागों में अंडे देती हैं। इससे लार्वा निकलकर अंदर पनपते हैं और फसल को क्षति पहुंचाते हैं।

हरियाणा और पंजाब में भी सप्लाई
डॉ. पंकज सूद ने बताया कि इस ट्रैप का परीक्षण व आंकलन किसानों के खेतों में किया गया जो काफी सफल रहा। मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, कुल्लू, सोलन, सिरमौर और चंबा में इस ट्रैप को लेकर काफी उत्साह है। ट्रैप के सफल परीक्षण के बाद अब इसकी सप्लाई हरियाणा और पंजाब में भी की जा रही है।
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