वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बुधवार को बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। राजधानी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समेत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कोई कामकाज नहीं हुआ। शहर के एटीएम भी खाली रहे। पैसा निकलवाने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।\
लोग एक एटीएम से दूसरे में भागते नजर आए। वेतनवृद्धि की मांग को लेकर पंजाब नेशनल बैंक की लिफ्ट शाखा के बाहर सुबह दस बजे कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बैंक हड़ताल से जिला शिमला में करोड़ों रुपये का कारोबार भी प्रभावित हुआ। बैंकों में नकदी निकासी, जमा और चेक क्लियरेंस प्रक्रिया बाधित रहने से पैसे का आदान प्रदान कम हुआ।
यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर राजधानी के सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंक कर्मियों ने हड़ताल की। यूनियन के प्रदेश संयोजक प्रेम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों की समस्याओं पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही।
यूनियन नेताओं ने आईबीए के 11 प्रतिशत वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को नकारते हुए 23 प्रतिशत वेतन वृद्धि की मांग की। बैंक कर्मियों का वेतन समझौता दो वर्ष से लंबित है। इसके फलस्वरूप वह आज सबसे कम वेतन पाने वाले कर्मी बन गए हैं।
सहसंयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों में करीब 2.50 करोड़ के एनपीए (खराब लोन) हैं। इसमें अधिकांश राशि 35 प्रमुख औद्योगिक घरानों की बकाया है।
वक्ताओं ने मांग की कि लोन नहीं चुकाने वालों को डिफाल्टर घोषित किया जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए। इस पैसे की वसूली सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाए। यह राशि आम जनता की मेहनत की कमाई है।
यूनियन ने मांग करते हुए कहा कि बैंकों में जो आम जनता का पैसा है, वह राष्ट्र की प्रगति के लिए उपयोग किया जाना चाहिए न कि निजी कंपनियों की कारपोरेट लूट के लिए।
इस अवसर पर एआईबीओसी के प्रादेशिक प्रधान हरदेव गर्ग, प्रदेश सचिव गोपाल शर्मा, एबाईपीएनबीओए के प्रधान एसपी वर्मा, प्रदेश बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव प्रेम वर्मा, पीएनबी स्टाफ यूनियन के उपप्रधान शशि शर्मा और एआईबीओसी के कोषाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया।