सिर्फ ऑक्यूपेंसी से ही होटलों की कमाई का आकलन नहीं हो सकता, बैंक्वेट हॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और एंट्री फीस से भी करोड़ों की कमाई होती है। फागू, खड़ापत्थर और दाड़लाघाट के जिन होटलों को बंद करने के आदेश हुए हैं, वहां शादियों की बुकिंग हो चुकी है और करोड़ों रुपये अग्रिम जमा हो चुके हैं। कर्मचारी संघ पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों को एचपीटीडीसी की कमजोर माली हालत के लिए जिम्मेदार बताया। होम स्टे पाॅलिसी से नुकसान हो रहा है। सरकारी कार्यक्रमों की पेमेंट समय से नहीं दी जाती। सरकार से निगम को 50 करोड़ ग्रांट देने का आग्रह किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
कहा कि 5 नवंबर को हुई निदेशक मंडल की बैठक में होटलों को निजी हाथों में सौंपने को लेकर चर्चा हुई है और फैसले भी लिए हैं। निगम चेयरमैन कर्मचारियों से बात करने को तैयार नहीं हैं। पिछली सरकार में होटलों के रखरखाव के लिए जो पैसा एडीबी के तहत मिला था, वह इस सरकार ने सत्ता में आते ही वापस ले लिया। कोरोना काल और प्राकृतिक आपदा से निगम को नुकसान हुआ। इस कारण पेंशनरों को वित्तीय लाभ जारी नहीं हो पा रहे। कर्मचारी संघ ने एलान किया कि अगर सरकार का ऐसा ही रवैया रहा तो भारतीय मजदूर संघ के सहयोग से सभी कर्मचारी आंदोलन पर उतरने से भी संकोच नहीं करेंगे।
विधानसभा में 80 की चाय 12 में, कैसे होगी कमाई
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सालभर निगम कमाई करता है और वीआईपी की आवभगत में लुटा देता है। विधानसभा में 80 रुपये की चाय 12 रुपये में देनी पड़ती है। एचपीटीडीसी लुटाने का जरिया बन गया है। निगम की संपत्ति का प्रयोग सिर्फ सैलानियों के लिए नहीं, बल्कि वीवीआईपी अतिथियों के लिए हो रहा है। कोरोना काल में निगम के होटलों को क्वारंटीन सेंटर के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया।