हिमाचल की ओर से बीते कई वर्षों से गर्मियों में अतिरिक्त बिजली पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और अन्य पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग आधार पर दी जाती रही है। प्रदेश में इस दौरान बिजली की अधिक मांग नहीं होती, जबकि उत्पादन अधिक होता है। बैंकिंग सिस्टम के तहत हिमाचल गर्मियों में अतिरिक्त बिजली अन्य राज्यों को देकर उनसे सर्दियों में जब प्रदेश में उत्पादन कम हो जाता है और मांग बढ़ती है, तब वापस लेता था।
राज्य सरकार के बिजली शेयर को बोर्ड 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदता था। अब सरकार ने बिजली परियोजनाओं से मिलने वाली निशुल्क बिजली को खुले बाजार में बेचकर राजस्व कमाने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत बोर्ड को अब सरकार से सस्ती बिजली नहीं मिलेगी। ऐसे में बोर्ड ने बैंकिंग को बंद करने का फैसला लिया है।
प्रदेश में तापमान बढ़ने और बर्फ पिघलने से जल विद्युत परियोजनाओं में पानी की उपलब्धता बढ़ गई है। इसके चलते बिजली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इन दिनों प्रदेश में रोजाना करीब 400 लाख यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है।
बिजली बैंकिंग ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें एक राज्य अतिरिक्त उत्पादन के समय दूसरे राज्य को बिजली देता है। बाद में जरूरत पड़ने पर उतनी ही मात्रा या तय शर्तों के अनुसार बिजली वापस लेता है। हिमाचल जैसे जल विद्युत आधारित राज्यों के लिए यह व्यवस्था लंबे समय तक फायदेमंद मानी जाती रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल का जल विद्युत उत्पादन मौसम पर निर्भर रहता है। नवंबर से फरवरी के दौरान जलस्तर कम होने से उत्पादन में भारी गिरावट आती है। ऐसे में बैंकिंग व्यवस्था समाप्त होने से बिजली बोर्ड को सर्दियों में ऊंची कीमत पर बिजली खरीदनी पड़ सकती है।