शिमला के ठियोग में विद्युत बोर्ड की लापरवाही ने एक मां के दीपक को बुझा दिया है। बोर्ड की ऐसी लापरवाही बार-बार सामने आ रही है और हर बार इसकी कीमत कर्मचारियों को जान देकर चुकानी पड़ रही है। तीन साल में तीन कर्मचारियों की करंट लगने से मौत हो गई है।
वीरवार को एक युवा और जूनियर टीमेट की करंट लगने से मौत हो गई। बोर्ड के अधिकारी ने दीपक निवासी कानग, किन्नौर को मत्याना के पास एचटी लाइन के ट्रांसफार्मर को स्विच डाउन करने के लिए कहा। जैसे की दीपक ने स्विच डाउन करने लगा तो उसे करंट आ गया।
इससे उसकी मौत हो गई। सवाल उठ रहा है कि स्विच डाउन करते समय करंट कैसे आ गया। अधिकारी ने जूनियर टीमेट को स्विच डाउन करने के लिए फोन पर कह दिया जबकि जूनियर टीमेट से कार्य अधिकारियों की मौजूदगी में करवाया जाता है।
अधिकारी ने नशे में आर्डर दिया था। उसका मेडिकल करवाया गया तो नशे की पुष्टि हुई। अधिकारी एसडीओ बलवीर कुमार को गिरफ्तार किया गया। डीएसपी रतन सिंह नेगी ने मामले की पुष्टि की। कहा कि एसडीओ को जमानत पर रिहाई मिल चुकी है।
गंभीरता नहीं दिखा रहा बोर्ड
मामला इतना गंभीर होने के बाद भी विद्युत बोर्ड इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। इस मामले में एक्सईएन बीएल कौंडल से जब बात की तो उन्होंने एसडीओ के शराब के नशे में होने की बात से इनकार कर दिया।
...और मां से छिन गया उसका दीपक
दीपक बीते कुछ दिनों से बीमार चल रहा था। किन्नौर जिला के कानम गांव से उसकी मां गंगा मौनी (50) उसे मिलने के लिए दो दिन पहले ही ठियोग पहुंची थी। उसकी मां को क्या मालूम था कि उसका बुढ़ापे का सहारा दीपक दो दिन बाद उससे छिन जाएगा।
पढ़ाई पूरी करने के बाद दीपक ने सोलन से आईटीआई करने के बाद छह माह पूर्व ही ठियोग में ड्यूटी ज्वाइन की थी। हादसे की खबर सुनने के बाद दीपक के शिमला, रामपुर और किन्नौर से सैकड़ों रिश्तेदार सिविल अस्पताल ठियोग पहुंच गए थे। परिवार में दीपक और उसकी मां ही रहते थे।