बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की राष्ट्रीय समन्वय समिति के आह्वान पर सोमवार को बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस शिमला में कर्मचारी यूनियन ने प्रदर्शन कर बिजली संशोधन कानून 2021 का विरोध किया। समिति ने कहा कि यदि केंद्र सरकार अपने फैसले को नहीं बदलेगी तो 10 अगस्त या उससे पहले जब भी बिल को चर्चा के लिए संसद में लाया जाएगा के दिन हड़ताल की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा, पावर इंजीनियरिंग एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश ठाकुर और डिप्लोमा जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के उपप्रधान लाल चंद ने कहा कि संशोधित कानून से होने वाले नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह देश की बिजली वितरण के सात लाख करोड़ रुपये के व्यवसाय को निजी घरानों को सौंपने का अहम दस्तावेज है।
बिजली संशोधन विधेयक 2021 के माध्यम से केंद्र सरकार बिजली आपूर्ति और वितरण नेटवर्क को अलग-अलग कर बिजली वितरण का लाइसेंस लेने की शर्त को समाप्त करने जा रही है। इससे बिजली वितरण के संपूर्ण निजीकरण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। इस बिल में प्रावधान है कि किसी भी क्षेत्र में एक से अधिक बिजली कंपनियां बिना लाइसेंस लिए कार्य कर सकेंगी।
बिजली वितरण के लिए यह निजी कंपनियां सरकारी वितरण कंपनी का आधारभूत ढांचा और नेटवर्क इस्तेमाल करेंगी। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि कंपनियां केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ही बिजली देंगी, जिससे सरकारी बिजली कंपनियों की वित्तीय हालत और खराब हो जाएगी।
इससे एक ओर जहां कर्मचारियों की पदोन्नति, वित्तीय लाभ व अन्य सेवा शर्तें बुरी तरह से प्रभावित होगी वहीं लगभग 27 हजार पेंशनरों की पेंशन की अदायगी पर भी प्रश्न चिह्न खड़ा हो जाएगा। बिजली कंपनियों का ढांचागत विकास रुक जाएगा और कमोवेश स्थिति बीएसएनएल की तरह हो जाएगी।