राज्य अध्यक्ष पद के लिए केवल वही उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे, जो अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय इकाई के निर्वाचित अध्यक्ष होंगे। इससे संगठन में सीधे छात्र समुदाय से जुड़े नेताओं को आगे आने का अवसर मिलेगा। इससे मनोनयन की बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं को नेतृत्व का अवसर प्राप्त होगा। प्रथम वर्ष के छात्रों को भी चुनाव प्रक्रिया में शामिल करने के लिए विशेष प्रावधान किया है। जिन विद्यार्थियों को अभी तक कॉलेज पहचान पत्र जारी नहीं हुआ है, वे फीस जमा करने की आधिकारिक रसीद के आधार पर सदस्यता लेकर मतदाता बन सकेंगे।
संगठनात्मक चुनाव के पीआरओ राकेश बैरवा ने बताया कि यदि कोई प्रथम वर्ष का छात्र चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे फोटोयुक्त, कॉलेज या विश्वविद्यालय प्रशासन से हस्ताक्षरित एवं मुहरयुक्त प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे नए छात्रों की भागीदारी भी सुनिश्चित हो सकेगी। यूनिट कमेटियों के पुनर्गठन में सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक इकाई में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और आठ महासचिव चुने जाएंगे। महासचिव पदों में दो सामान्य श्रेणी के अलावा एक एससी, एक महिला तथा एक-एक पद एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। इससे विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
दो चरणों में पूरी होगी चुनावी प्रक्रिया
एनएसयूआई चुनाव कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में कॉलेज और विश्वविद्यालय इकाइयों का गठन होगा, जबकि दूसरे चरण में जिला और प्रदेश नेतृत्व का चुनाव कराया जाएगा। कॉलेज एवं विश्वविद्यालय चुनाव के लिए 31 जुलाई तक नामांकन दाखिल होंगे। 4 अगस्त से 1 सितंबर तक सदस्यता अभियान चलेगा। 2 सितंबर सदस्यता शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि है। 6 अक्तूबर को कॉलेज और विश्वविद्यालय इकाई चुनाव परिणाम घोषित होंगे। जिला एवं प्रदेश चुनाव के लिए 7 से 9 अक्तूबर तक नामांकन दाखिल होंगे। 17 अक्तूबर को मतदान होगा और 20 अक्तूबर को परिणाम घोषित होंगे।
छात्र राजनीति में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
एनएसयूआई के इस चुनावी अभियान को आगामी छात्र राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय बाद संगठनात्मक स्तर पर व्यापक चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से कॉलेज परिसरों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सदस्यता अभियान, चुनाव प्रचार और नेतृत्व चयन के दौरान छात्र संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। इस प्रक्रिया से निकलने वाला नेतृत्व भविष्य में कांग्रेस और युवा कांग्रेस की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव सीधे छात्र नहीं करेंगे। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से चुने गए निर्वाचित अध्यक्ष ही जिला और राज्य कार्यकारिणी के चुनाव में मतदाता होंगे। यानी कैंपस स्तर पर चुना गया नेतृत्व ही एनएसयूआई के अगले प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों का फैसला करेगा।