बागवानी मिशन के तहत इटली से आयातित करीब साढ़े आठ हजार सेब के सूखे पौधे विभाग ने अपने बठारा फार्म में रोप दिए हैं। बद्दी कोल्ड स्टोर में सूखे इन पौधों को रोपने पर विभाग ने करीब दो लाख रुपये खर्च कर डाले। महकमे के विशेषज्ञों की लाख कोशिशों के बावजूद विदेशी किस्म के इन पौधों में मुश्किल से दो फीसदी पौधे ही बच पाएंगे।
बागवानी विभाग ने अगस्त में सेब के सूखे पौधे लगाकर सरकारी धन बर्बाद कर दिया है। बठारा जैसी कम ऊंचाई में सेब के पौधों को लगाने का सही समय अप्रैल तक ही रहता है। अधिकारियों ने अगस्त में रामपुर के बठारा फार्म में करीब साढ़े आठ हजार पौधे लगाने को दिए थे। इन सेब के पौधों को लगाने में मशीन, लेबर, पानी, खाद और बागवानी विशेषज्ञों पर विभाग ने और पैसे खर्च कर दिए हैं।
बागवानों को लाभ देने के लिए विदेशों से मंगवाए गए करोड़ों के पौधे अनुदान पर दो सौ रुपये में दिए जाने थे। लेकिन सेब के सूखे पौधों को किसी भी बागवान ने नहीं खरीदा। अधिकारियों का बठारा फार्म में सूखे पौधों को लगाने के पीछे क्या मकसद रहा होगा, यह कहना मुश्किल है।
लेकिन माना जा रहा है कि अधिकारियों ने कोल्ड स्टोर में सूखे पौधों में कुछ बचा कर विभाग की किरकिरी से बचने का प्रयास किया होगा। उप निदेशक बागवानी सुभाष चंद ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। एसएमएस रामपुर किशोरी लाल ने बताया कि 3 अगस्त को पौधे आए थे। कितने प्रतिशत पौधे बचे हैं, अभी नहीं बता सकते।