इसके साथ ही उन्होंने स्कूल प्रभारी से स्कूल में सेवारत अध्यापकों के सेवाकाल के बारे में भी पूछताछ की। जिस पर स्कूल हेड ने कहा कि कुछ अध्यापकों को एक से डेढ़ साल हुआ है, जबकि कुछ अध्यापक पांच से छह साल से स्कूल में सेवारत हैं।
इसी के साथ प्राइमरी स्कूल में शौचालय निर्मित करने के लिए भी उपशिक्षा निदेशक को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। मंत्री के औचक निरीक्षण से स्कूल स्टाफ में हड़कंप मच गया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कारगर कदम उठा रही है।
इस अवसर पर शिक्षा उपनिदेशक सोमदत्त सांख्यान, शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक रवित कटोच और एसी टू डीसी अनुपम ठाकुर सहित शिक्षा विभाग के विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे।
संघ के कार्यालय में भी गए भारद्वाज
सुरेश भारद्वाज स्कूलों के औचक निरीक्षण के बाद हमीरपुर शहर में एक सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी के घर गए और वहां चाय की चुस्कियां लीं। इसके बाद वह सुबह 11 बजे नेरी स्थित ठाकुर जगदेव चंद शोध संस्थान में आरएसएस के कार्यालय में भी गए। संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात के बाद दोपहर बाद वह हमीरपुर से धर्मशाला के लिए रवाना हो गए।
स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान मिलने वाली कमियों को अब मौके पर दूर किया जाएगा। सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा बढ़ाने के लिए निरीक्षण निदेशालय ने यह फैसला लिया है। निरीक्षण को जाने वाले अधिकारी मूलभूत सुविधाओं के अलावा स्कूली बच्चों का ज्ञान भी जांचेंगे।
बच्चों में पाई जाने वाली कमियों को दूर करने के लिए यह निरीक्षण अधिकारी बच्चों को पढ़ाने के सरल तरीकों से शिक्षकों को अवगत करवाएंगे। स्टाफ की कमी की समस्या को मौके से ही निदेशालय से संपर्क कर बताएंगे। ऐसे स्कूलों का एक माह बाद दोबारा से औचक निरीक्षण किया जाएगा।
इस दौरान दोबारा बच्चों का ज्ञान जांचा जाएगा। फिर कमियां पाए जाने पर शिक्षकों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सरकारी स्कूलों का ढांचा मजबूत करने के लिए निरीक्षण निदेशालय का गठन किया गया है।
निरीक्षण निदेशालय के तहत नियुक्त अधिकारियों को निरंतर प्रदेश के स्कूलों का दौरा करने का काम सौंपा गया है। अभी तक निरीक्षण अधिकारी स्कूलों में पाई जाने वाली कमियों की सूची तैयार कर शिमला भेजते रहे हैं। इन कमियों पर शिमला में बैठकर अधिकारी मंथन करते हैं।
इस प्रक्रिया में अब बदलाव किया गया है। भविष्य में औचक निरीक्षण को जाने वाले अधिकारियों को मौके से ही कमियों को दूर करना होगा। मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए फील्ड से ही दूसरे अफसरों को अवगत करवाना होगा।
इसके अलावा उन्हें बच्चों का ज्ञान स्तर भी जांचना होगा। बच्चों में पाई जाने वाली कमियों को मौके पर दूर करने के प्रयास करने होंगे। एक माह के दोबारा स्कूलों में जाना होगा। पूर्व में लिए गए फैसलों की स्थिति को भी जांचना होगा।
उच्च शिक्षा निदेशालय में गठित किए गए निरीक्षण निदेशालय में स्थाई अधिकारी को नियुक्त किए जाने की जरूरत है। वर्तमान में संयुक्त निदेशक स्कूल को निरीक्षण निदेशालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। उधर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरदेव ने बताया है कि निरीक्षण निदेशालय को मजबूत करने का मामला सरकार के ध्यानार्थ भेजा जाएगा।