शिक्षा मंत्री ने कहा कि बीएड/डीएलएड विद्यार्थियों को उनके पैतृक स्थान में शैक्षणिक पद्धतियों का अभ्यास करने के लिए भेजा जाएगा। एक स्कूल में पांच से अधिक बीएड/डीएलएड विद्यार्थियों को नहीं भेजा जाएगा। बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने तथा स्कूल के संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कॉम्पलेक्स स्कूल प्रणाली को शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा मर्ज किए गए स्कूलों के विद्यार्थियों को समीपवर्ती स्कूलों में दाखिला दिलवाना सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने उप-निदेशकों को सत्र के दौरान नियमित रूप से स्कूलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को भी सहयोगी बनाया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य कार्यक्रम अधिकारी एनएचएम डॉ. रविंद्र कुमार ने प्रस्तुति भी दी।
राज्य में 94.46 करोड़ रुपये की लागत से 42 स्थानों पर डे-बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 100 विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार द्वारा 45 स्कूलों को एफिलिएटिड किया गया है। इन स्कूलों में बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए विषय विशेषज्ञ अध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली, शिक्षा विभाग तथा हिमुडा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।