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विदेशी करंसी मामले में करमापा को क्लीन चिट

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तिब्बती धार्मिक नेता ओग्येन त्रिनले दोरजी को विदेशी विनियम मुद्रा कानून के उल्लंघन मामले में उनके खिलाफ लगाए आरोपों को खत्म कर दिया है और उन्हें क्लीन चिट दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तिब्बती धार्मिक नेता ओग्येन त्रिनले दोरजी को विदेशी विनियम मुद्रा कानून के उल्लंघन मामले में उनके खिलाफ लगाए आरोपों को खत्म कर दिया है और उन्हें क्लीन चिट दे दी है।
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चार साल पुराने इस मामले में करमापा तथा उनके सहयोगियों पर करीब छह करोड़ रुपये मूल्य की गैर कानूनी विदेशी मुद्रा और घरेलू मुद्रा रखने के आरोप लगे थे। प्रवर्तन निदेशालय ने 5.97 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा को जब्त करने के आदेश दिए थे।

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने जनवरी 2011 में एक वाहन से करमापा के सहयोगियों के पास से संदिग्ध नकदी बरामद की थी। इसके बाद करमापा के मठ से भी नकदी जब्त की गई थी। इसके बाद ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया था और विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के प्रावधानों के तहत जांच शुरू कर दी थी।
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जांच में नहीं मिले सबूत

जांच के बाद यह पता चला है कि जब्त की गई राशि और विदेशी भक्तों से प्राप्त दान की रकम को इकट्ठा करने और उसके प्रबंधन में करमापा और उनके दो सहयोगियों की कोई भूमिका नहीं है। संदिग्ध हवाला लेन-देन के तहत ये सभी जांच के घेरे में थे।

हिमाचल पुलिस ने वर्ष 2012 में धार्मिक नेता के नाम को चार्जशीट के दायरे से बाहर कर दिया था। ईडी के मुताबिक करमापा कभी भी रोजाना के लेन देन और कार्यालय के कामकाज में शामिल नहीं हुए। गौरतलब है कि करमापा के सहयोगी के वाहन से संदिग्ध नगदी बरामद होने के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने 27 जनवरी 2011 को ग्यूतो बौद्ध मठ सिद्धबाड़ी धर्मशाला में छापामारी की थी।

पुलिस ने ग्यूतो मठ सिद्धबाड़ी से चीन सहित 26 देशों की मुद्रा बरामद की थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले में जांच शुरू कर की थी। 8 दिसंबर, 2011 ऊना पुलिस ने मामले में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
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