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ढली में बिजली गुल, चार्जिंग न होने से इलेक्ट्रिक बसें खड़ी

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पीस मील कर्मियों की हड़ताल के बीच लोकल रूटों पर बसों की किल्लत
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क्रॉसर
सुबह 11 से एक बजे तक गुल रही बिजली
ढली सेक्टर के तहत शहर में चलती हैं 26 बसें
तीन बजे के बाद बसों की चार्जिंग शुरू हो पाई
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ढली में बिजली गुल होने से बुधवार को शहर में एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सुबह 11 से 1 बजे के बीच ढली में बिजली न होने से एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसें चार्ज नहीं हो सकीं। इस कारण शहर में मुद्रिका, ढली मल्याणा आईएसबीटी, जतोग और तत्तापानी रूट पर बस सेवा प्रभावित हुई।
बुधवार को शहर के लोगों को बसों की किल्लत से जूझना पड़ा। पीस मील कर्मियों की हड़ताल के कारण डीजल बसों की मरम्मत न होने से पेश आ रही समस्या के बीच बुधवार को शहर की आधी इलेक्ट्रिक बसें खड़ी हो गईं। ढली वर्कशाप में लगे चार्जिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रिक बसें दो शिफ्ट में चार्ज होती हैं लेकिन बुधवार को दिन के समय बसों की चार्जिंग नहीं हो पाई। एचआरटीसी की ओर से शिमला से तत्तापानी के लिए चलने वाली इलेक्ट्रिक बस दिन के रूट पर रवाना नहीं हो पाईं।
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संजौली मुद्रिका रूट पर चलने वाली बसें संचालित न होने से यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। ढली, मल्याणा, आईएसबीटी रूट पर भी बस सेवा प्रभावित रही। एक बजे बिजली आने के बाद बसों की चार्जिंग शुरू हुई लेकिन एक बार में दो ही बसें चार्ज होने के कारण देर शाम तक समस्या बनी रही। संजौली चौक से आईजीएमसी और लक्कड़ बाजार रूट पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बस और इलेक्ट्रिक वैन का संचालन भी प्रभावित हुआ।
बिजली न होने से हुई दिक्कत : आरएम
एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक शिमला लोकल जितेंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि बुधवार को ढली में बिजली न होने के कारण इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रभावित हुआ है। ढली सेक्टर के तहत चलने वाली 26 इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग में समस्या पेश आई। हालांकि ओल्ड बस स्टैंड में बसों की चार्जिंग होती रही।
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पीस मील वर्कर की हड़ताल से रूट प्रभावित होने शुरू
पीस मील वर्कर की हड़ताल के कारण राजधानी शिमला सहित जिलेभर में एचआरटीसी बसों के रूट प्रभावित होने शुरू हो गए हैं। वर्कशाप पहुंचने वाली बसों की मरम्मत नहीं हो पा रही। रोजाना हर डिपो की 3 से 4 बसे वर्कशाप पहुंच रही हैं। एचआरटीसी के शिमला लोकल, शिमला ग्रामीण, तारादेवी, नेरवा, रामपुर और रोहड़ूू में रोजाना 60 से 70 रूट प्रभावित हो रहे हैं।
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