दशहरा उत्सव में इस साल 266 देवी-देवताओं ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। इसमें कई देवी-देवता पहली बार उत्सव में आए हैं। बाह्य सराज निरमंड से लेकर ऊझी घाटी, मनाली तक सोने-चांदी के मुख मोहरे तथा आभूषण से सजे देवरथों से अठारह करडू की सौह स्वर्गलोक में तबदील हो गई है।
दशहरा उत्सव समिति के रजिस्टर में 266 देवी देवताओं का पंजीकरण हुआ है। जबकि 2018 में 274, 2017 में यह संख्या में 249 थी और 2016 में 227 देवी देवताओं ने भाग लिया था। दशहरा उत्सव कमेटी ने 331 देवी देवताओं को निमंत्रण दिया था।
अभी तक पहुंचे 260 देवी देवताओं में 123 गैर माफीदार व 136 माफीदार और सात बिना बुलाए देवी-देवता शामिल हुए हैं। वहीं बिन बुलाए देवताओं की संख्या भी दशहरा में साल दर साल बढ़ रही है।
जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं की संख्या बढ़ रही है। एडीएम कुल्लू अक्षय सूद ने मंगलवार शाम तक उनके पास 266 देवी देवता पहुंचे हैं।