शाम करीब साढ़े पांच बजे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मंदिर पहुंचे। उन्होंने यहां पर विधिवत पूजा अर्चना की। पूजा के बाद सीएम प्रांगण में आए और रिमोट का बटन दबाकर रावण का दहन किया।
बटन दबते ही रावण के 40 फुट ऊंचे पुतले से अंगारे बरसे और आतिशबाजी शुरू हो गई और पुतला धूं धूं कर जल उठा। इसके बाद मेघनाद का 35 फीट और कुंभकर्ण का 30 फीट का पुतला भी जल गया।
संकटमोचन, बीसीएस, नाभा, बालूगंज, टुटू और समरहिल के अलावा आसपास की जगहों में भी रावण के पुतले जलाए गए। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, उपायुक्त शिमला अमित कश्यप, उप महापौर राकेश कुमार शर्मा, शहरी एसडीएम नीरज चांदला समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जाखू मंदिर में बने पांडुलिपियों के म्यूजियम का उद्घाटन किया। मंदिर में महाभारत के समय की 52 पांडुलिपियां रखी गई हैं। अमृतसर के रजनीश खौंसला जोकि वैष्णो देवी शराइन बोर्ड के सदस्य भी है, उन्होंने यह पांडुलिपियां जाखू मंदिर के लिए दान की है।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने नवग्रह मंदिर का शिलान्यास भी किया। इस मंदिर में नौ ग्रह से संबंधित मूर्तियां रखी जाएंगी। मंदिर को एक साल के भीतर तैयार कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जाखू मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे थे। इसी बीच प्रांगण में खड़े रावण के पुतले से शाम 5:52 मिनट पर मुंह से अनार जल उठा। लेकिन कुछ देर बाद वह बंद हो गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री आए और बटन दबाकर रावण दहन किया। लेकिन हकीकत में पुतले के पास खड़े हुए लोगों ने मशालें जलाकर पुतले को जलाया।
रावण दहन को लेकर लोग प्रांगण में छाते लेकर रावण दहन का इंतजार करते रहे। वहीं पुतले भी भीग गए थे। दहन के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले आधे ही जले थे।
लोग आधे अधूरे रावण के पुतलों से लकड़ियां उठाकर ले गए। लोगों के मुताबिक इस लकड़ी को पवित्र माना जाता है। पुलिस की टीम ने लोगों से आग्रह किया कि पहले इन्हें जलने दो इसके बाद इन्हें ले जाना। लेकिन लोगों ने एक न सुनी और लकड़ियां उठाने लग पड़े।