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अफसरों की लापरवाही से शुरू नहीं हुआ रिज का मरम्मत कार्य

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जमीन राज्य सरकार के नाम और नगर निगम वन महकमे से मांगता रहा एनओसी
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अब राजस्व रिकॉर्ड से हुआ खुलासा सरकार की है जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ऐतिहासिक रिज मैदान को धंसने से बचाने के लिए वन महकमे के अड़ंगे से काम शुरू नहीं हो पाया है। बारिश के चलते धंसे हुए हिस्से में पानी रिस रहा है जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। नगर निगम की एक गलती से वन महकमा प्रोजेक्ट पर भारी पड़ गया है।
यहां रिज मैदान को सहारा देने के लिए एक व्यावसायिक परिसर का निर्माण भी किया जाना है लेकिन एनओसी के पेच से काम शुरू नहीं हो पा रहा।
वन महकमे ने साफ कहा कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस के बाद ही वह अनापत्ति पत्र जारी करेगा। लेकिन जिस प्रस्तावित जगह का अनापत्ति पत्र वन महकमा देने की बात कर रहा है वह जमीन वन महकमे की है ही नहीं। इसका खुलासा उपायुक्त कार्यालय में राजस्व रिकार्ड देखने के बाद हुआ। इस जमीन परकब्जा राज्य सरकार का है। जमीन से वन महकमे का कोई लेना देना नहीं है, न ही अनापत्ति लेने की जरूरत है। लोक निर्माण विभाग ने जानकारी के अभाव में फॉरेस्ट को अनापत्ति जारी करने के लिए लिखा और वन महकमे ने भी बिना छानबीन के ही फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने के बाद अनापत्ति पत्र जारी करने के लिए कह दिया।
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लोक निर्माण विभाग की फाइल पर पहले फॉरेस्ट गार्ड ने आपत्ति जता दी उसी फाइल पर वन महकमे के अधिकारियों ने भी अपनी सहमति दे दी। बाद में रिकॉर्ड खंगाला तो जमीन किसी और की ही निकली। इस वजह से प्रोजेक्ट शुरू होने में करीब छह महीने से अधिक का विलंब हो चुका है। नगर निगम ने भी इस बारे में सरकार को पत्र भेज दिया है। नगर निगम का कहना है कि रिज को धंसने से बचाने के लिए जिस जगह काम होना है, वह राजस्व रिकॉर्ड में वन भूमि नहीं है। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि जैसे ही नगर निगम एनओसी दिला देगा रिज को बचाने के काम का टेंडर भी कॉल कर दिया जाएगा।
25 करोड़ किए जाने हैं खर्च
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 25 करोड़ रुपये से रिज का मरम्मत कार्य किया जाना है। इसमें एक नया व्यवसायिक परिसर बनाया जाना प्रस्तावित है ताकि धंस रहे रिज को मजबूती मिल सके। वन विभाग का इस जमीन से कोई लेना देना नहीं है लेकिन अब दावा कर रहा है कि नगर निगम पहले एफसीए के तहत मंजूरी ले, फिर काम शुरू करवाए। नगर निगम अस्थायी रूप से टारिंग कर इसकी दरारों को भरने की योजना बना रहा है।
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क्या कहते हैं उपायुक्त
डीसी आदित्य नेगी ने कहा कि राजस्व विभाग के रिकार्ड में यह जमीन राज्य सरकार के नाम पर है। इनके पास मामला आने के बाद स्थिति स्पष्ट कर संबंधित महकमों को जानकारी मुहैया करवा दी गई है।
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