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सड़क के इंतजार में एक हजार गांव, कब पूरी होगी फरियाद

Wed, 15 Apr 2015 11:22 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश की 492 सड़कें फॉरेस्ट क्लीयरेंस के पेंच में फंस गई हैं। इन सड़कों का निर्माण कार्य इसी साल किया जाना था, लेकिन केंद्र सरकार से मंजूरी न मिलने से क्लीयरेंस न मिलने के कारण मामला लंबित पड़ गया है।
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फॉरेस्ट क्लीयरेंस में सर्वाधिक 285 सड़कें मंडी जिले की हैं। शिमला जिले की 48 सड़कों में ऐसी भी सड़कें हैं, जो पहले 15 साल तक फॉरेस्ट क्लीयरेंस में फंसी रहीं और अब गिफ्ट डीड न होने से मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश के हर गांव को सड़क से जोड़ा जाना है। प्रदेश में एक हजार से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां अभी सड़क नहीं पहुंच पाई है। इसमें 500 और ढाई सौ की आबादी वाले गांव शामिल हैं।
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मंडी जिले की सर्वाधिक 285, कांगड़ा की 33 सड़कें

आंकड़ों पर गौर करें तो चंबा जिले के पांच विधानसभा क्षेत्र की 41 सड़कें, कांगड़ा जिले के 15 विधानसभा क्षेत्र की 33 सड़कें, लाहौल-स्पीति की 8 सड़कें, कुल्लू जिले के चार विधानसभा क्षेत्र की 16 सड़कें, मंडी जिले 10 विधानसभा क्षेत्र की 285 सड़कों का काम रूका हुआ है।

वहीं ऊना जिले के पांच विधानसभा क्षेत्र की 4 सड़कें, बिलासपुर जिले के 4 विधानसभा क्षेत्र की 3 सड़कें, सोलन जिले के 5 विधानसभा क्षेत्र की 11 सड़कें, सिरमौर जिले के पांच विधानसभा क्षेत्र की 5 सड़कें, शिमला जिला के 8 विधानसभा क्षेत्र की 48 सड़कें और किन्नौर जिले की 4 सड़कें फारेस्ट क्लीयरेंस में फंस गई हैं।

सरकार ने केंद्र से उठाया है क्लीयरेंस का मामला
इंजीनियर इन चीफ, लोक निर्माण विभाग नरेश शर्मा ने कहा कि हिमाचल की सड़कें केंद्र सरकार के कायदे और कानून के कारण फंसी हैं। बार-बार नियम बदल रहे हैं, जिससे लोक निर्माण विभाग का कार्य प्रभावित हो रहा है। नए सिरे से प्रोजेक्ट तैयार करने पड़ रहे हैं।
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